ईरान ने सशस्त्र हमलों के दोषी अली-सीना मुस्तफावी को दी फांसी, निर्वासित नेता रज़ा पहलवी ने बताया ‘देशभक्त युवा’

Tehran: ईरान के सरकारी न्यूज चैनल IRIB के मुताबिक, दक्षिणी शहर करमान में अली-सीना मुस्तफावी को बुधवार को फांसी दी गई है. उसे गोलीबारी की कई घटनाओं में दोषी ठहराया गया था, जिनमें एक बच्ची समेत कई आम लोग घायल हुए थे. IRIB के अनुसार, ये हमले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान हुए थे. चैनल ने दावा किया कि मुस्तफावी के संबंध राजशाही समर्थक समूहों से थे और उसने करमान एयरपोर्ट पर हमले की इच्छा भी जताई थी.

इज़रायल के समर्थन में काम का आरोप

ईरानी अधिकारियों ने मुस्तफावी पर निर्वासित विपक्षी नेता रज़ा पहलवी और इज़रायल के समर्थन में काम करने का आरोप लगाया था. इसके अतिरिक्त उन पर सैन्य ठिकानों और हमलों के वीडियो फुटेज विदेशी नेटवर्क को भेजने का भी आरोप था. 38 वर्षीय अली-सीना मुस्तफावी केरमान के रहने वाले एक पर्वतारोही और संगीतकार थे. उन्होंने हिमालय के ‘आइलैंड पीक’ की चढ़ाई भी की थी. उन्हें केरमान की शहाब जेल में रखा गया था, जहां फांसी से पहले उनके परिवार को आखिरी मुलाकात के लिए बुलाया गया था.

पहलवी ने मुस्तफावी को बताया एक देशभक्त युवा 

दूसरी ओर निर्वासित विपक्षी नेता रज़ा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुस्तफावी को एक देशभक्त युवा बताया. उन्होंने दावा किया कि मुस्तफावी को प्रताड़ित करके झूठा कबूलनामा लिया गया और दिखावटी मुकदमे के तहत यह सजा दी गई. मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित विपक्षी नेताओं ने इस मुकदमे की आलोचना की है. उनका आरोप है कि यह सजा जबरन लिए गए बयानों और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के अभाव में दी गई है, जिसका इस्तेमाल ईरान अक्सर प्रदर्शनकारियों और विरोधियों को दबाने के लिए करता है. ईरान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सजा बरकरार रखे जाने के बाद उन्हें कर्मान की शहाब जेल में फांसी दी गई.

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