ईरान में मानवाधिकारों पर फिर हमला, नोबेल विजेता नरगिस गिरफ्तार, समर्थकों में भारी आक्रोश, रिहाई की मांग

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Dubai: ईरान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को गिरफ्तार कर लिया है. अचानक उनकी गिरफ्तारी से समर्थकों में भारी आक्रोश है. उत्तर-पूर्व में स्थित मशहद में उनको उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वे एक मानवाधिकार वकील की स्मृति सभा में शामिल होने गई थीं. इस वकील की हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. नरगिस के नाम पर बनी एक संस्था ने इसकी जानकारी दी है.

मोहम्मदी को तुरंत जेल भेजा जाएगा या नहीं?

उधर, ईरान के एक अधिकारी ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इसके बाद 53 वर्षीय मोहम्मदी को तुरंत जेल भेजा जाएगा या नहीं? नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने मोहम्मदी की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई है और ईरानी अधिकारियों से उनकी तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग की है. एक मामले में नरगिस दिसंबर 2024 में चिकित्सीय कारणों से अस्थायी रिहाई पर थीं.

फिर से युद्ध के डर से जूझ रहा है ईरान

अब नरगिस की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब ईरान बुद्धिजीवियों और अन्य लोगों पर सख्ती कर रहा है, क्योंकि देश प्रतिबंधों, खराब होती अर्थव्यवस्था और इजरायल के साथ फिर से युद्ध के डर से जूझ रहा है. मोहम्मदी की गिरफ्तारी से पश्चिमी देशों का ईरान पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि इस दौरान ईरान बार-बार अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ नई वार्ता की इच्छा जता रहा है. हालांकि यह अभी तक शुरू नहीं हुई है.

सुरक्षा बलों और पुलिस ने उन्हें हिंसक तरीके से हिरासत में लिया

समर्थकों ने बताया कि आज सुबह सुरक्षा बलों और पुलिस ने उन्हें हिंसक तरीके से हिरासत में लिया. इसी समारोह में कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया. यह समारोह मशहद में रहने वाले 46 वर्षीय ईरानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता खोसरो अलीकुर्दी की याद में आयोजित किया गया था, जिन्हें इस महीने की शुरुआत में उनके दफ्तर में मृत पाया गया था. प्रांतीय अधिकारियों ने उनकी मौत को दिल का दौरा बताया लेकिन मौत के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती बढ़ गई, जिससे कई सवाल उठे हैं.

पूरे मामले की जांच कराने की मांग

नरगिस की गिरफ्तारी के बाद 80 से अधिक वकीलों ने हस्ताक्षर करके पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. न्यूयॉर्क स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान के कार्यकारी निदेशक हादी घाएमी ने कहा कि आज हमने जो देखा, वह इस्लामी गणराज्य द्वारा सबसे बुनियादी मानवीय स्वतंत्रता पर ताजा हमला है, जहां एक मारे गए वकील के लिए शोक मनाना भी दंडनीय अपराध बन जाता है. जब शांतिपूर्ण नागरिक बिना पीटे और घसीटे जाने के डर के शोक नहीं मना सकते, तो यह एक ऐसी सरकार को उजागर करता है जो सच और जवाबदेही से डरती है.

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