Isreal America Attack on Iran: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भूचाल आ गया है. सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने की आशंका है. युद्ध के चलते दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते हॉर्मुज ऑफ स्ट्रेट पर तेल के जहाजों की आवाजाही रोक दी गई है.
किसी झटके से कम नहीं
यह खबर वैश्विक बाजार के लिए किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20% इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. अगर यह रुकावट लंबे समय तक रही, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में तगड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.
1.6 मिलियन बैरल तेल का निर्यात
युद्ध शुरू होने से पहले ही ब्रेंट क्रूड सात महीने के उच्चतम स्तर (72.87 डॉलर) पर पहुंच गया था. ईरान हर दिन लगभग 1.6 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है. सप्लाई बाधित होने पर चीन ग्लोबल मार्केट में अन्य देशों पर निर्भर होगा, जिससे कीमतें और बढ़ेंगी.
खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई का मुख्य केंद्र
यह रास्ता सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई का मुख्य केंद्र है. यहां से निकला तेल भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई देशों तक पहुंचता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस रास्ते को पूरी तरह बंद करना ईरान के लिए भी नुकसानदेह होगा क्योंकि इससे उसका अपना निर्यात और इकलौता बड़ा ग्राहक चीन प्रभावित होगा.
असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं
युद्ध का असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है. अमेरिका में गैस की कीमतें 3 डॉलर प्रति गैलन के ऊपर जाने की संभावना है. मोटरिंग क्लब AAA के अनुसार, पिछले हफ्ते यह दर 2.98 डॉलर थी, जो अब तेजी से बढ़ सकती है.
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