क्या हैं ‘स्मार्ट ग्लासेस’, जिसपर बैन लगाने की तैयारी कर रहा नार्वे, क्यों पड़ी ऐसे सख्त कानून की जरूरत?

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Meta Ray-Ban Smart Glasses: टेक्नोलॉजी की दुनिया में जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विएरेबल डिवाइसेस (Wearable Devices) का दायरा जैसे जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हमारी प्राइवेसी पर खतरा गहराता जा रहा है. ऐसे में Ray Ban Meta जैसे स्मार्ट ग्लासेस आज के समय में केवल फैशन स्टेटमेंट या गाने सुनने का जरिया नहीं रहे, बल्कि ये बिना किसी को खबर हुए चुपचाप वीडियो रिकॉर्ड करने और फोटो खींचने का भी काम कर रहे हैं. इसी खतरे को देखते हुए यूरोपीय देश नॉर्वे ने पब्लिक प्लेस पर स्मार्ट ग्लासेस के इस्तेमाल पर रोक लगाने का मन बना लिया है.

नॉर्वे की इस पहल ने पूरी दुनिया में प्राइवेसी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. दरअसल, नॉर्वे की प्राइवेसी रेगुलेटर एजेंसियों और डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी का मानना है कि स्मार्ट ग्लासेस लोगों की निजी जिंदगी में सीधा दखल देते हैं. साथ ही नॉर्वे सरकार का मुख्य फोकस कई बड़ी चिंताओं पर भी है.
  1. साइलेंट रिकॉर्डिंग: बता दें कि सिंपल स्मार्टफोन से जब कोई फोटो या वीडियो लेता है, तो आसपास के लोगों को पता चल जाता है. लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में लगे कैमरे इतने छोटे होते हैं कि सामने वाले को भनक तक नहीं लगती कि उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है.
  2. पब्लिक स्पेस में डेटा चोरी: जिम, स्विमिंग पूल, चेंजिंग रूम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और अस्पतालों जैसी जगहों पर लोग बेफिक्र रहना चाहते हैं. लेकिन स्मार्ट ग्लासेस के कारण से कोई भी किसी भी वक्त दूसरों का डेटा जैसे चेहरा या हरकतें कैप्चर कर सकता है.
  3. AI और फेस रिकॉग्निशन: नए स्मार्ट ग्लासेस में एआई फीचर्स आ रहे हैं. अगर कोई स्मार्ट ग्लास पहने आपको देख रहा है, तो एआई टेक्नोलॉजी सेकंडों में आपका चेहरा पहचानकर आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल, नाम और निजी डिटेल्स निकालकर उस व्यक्ति को दे सकती है. यह किसी भी नागरिक की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.
नॉर्वे का मानना है कि यूरोपीय संघ के सख्त डेटा सुरक्षा कानून (GDPR) के तहत हर इंसान को यह तय करने का अधिकार है कि उसकी तस्वीर या वीडियो कब और कहां ली जाए. बिना सहमति के रिकॉर्डिंग करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

क्या हैं ये ‘स्मार्ट ग्लासेस’, यह सामान्य चश्मों से कैसे हैं अलग?

बता दें कि ये चश्मे दिखने में तो बिल्कुल सामान्य धूप के चश्मे या पावर वाले चश्मों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनके फ्रेम में मॉडर्न एम्बेडेड टेक्नोलॉजी लगी होती है:
  • इन-बिल्ट कैमरा: चश्मे के कोने में बहुत ही छोटा HD कैमरा होता है.
  • माइक्रोफोन और स्पीकर्स: ये आवाज रिकॉर्ड करने और फोन कॉल पर बात करने की सुविधा देते हैं.
  • वॉइस कमांड और टच कंट्रोल: बटन दबाकर या सिर्फ Hey Meta बोलकर तुरंत वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटो ली जा सकती है.
  • LED लाइट की नाकामी: टेक कंपनियां दावा करती हैं कि जब कैमरा ऑन होता है, तो चश्मे पर एक छोटी LED लाइट जलती है. लेकिन जानकारों का कहना है कि तेज धूप में या टेप लगाकर इस लाइट को आसानी से छिपाया जा सकता है.

दुनिया के अन्य देशों का क्या है रुख?

आपको बता दें कि सिर्फ नॉर्वे ही नहीं, बल्कि कई अन्य पश्चिमी देश भी Wearable Tech की वजह से पैदा हो रहे खतरों को लेकर सतर्क हो रहे हैं. ऐसे में यूरोपीय संघ की बात करें तो ईयू का GDPR कानून बिना सहमति के किसी की भी रिकॉर्डिंग करने पर भारी जुर्माना लगाता है. नॉर्वे का यह कदम पूरे ईयू में एक नजीर बन सकता है. दुनिया भर के कई प्रीमियम जिम, प्राइवेट क्लब, कैसीनो और सिनेमाघरों ने अपने कैम्पस में स्मार्ट ग्लासेस पहनकर आने पर पहले से ही रोक लगा रखी है.
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