कैंसर से जूझ रहे भारत के पूर्व कोच के इलाज में बाधा बना आर्थिक संकट, बेटियों ने लगाई मदद की गुहार!

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Sydney: भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच माइकल नोब्स करीब पांच सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व हॉकी खिलाड़ी माइकल के फेफड़ों का कैंसर अब उनकी हड्डियों तक फैल चुका है. बीमारी के साथ-साथ उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका इलाज कराना मुश्किल हो गया है. उनकी बेटियों की अपील में करीब 75 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मदद में मिले, इसके बावजूद इलाज पूरी तरह सुचारु रूप से नहीं चल पा रहा है.

काफी महंगी एमीवेंटामैब नाम की एक विशेष दवा की जरूरत

क्राउडफंडिंग पोर्टल पर दी गई जानकारी के मुताबिक माइकल नोब्स के इलाज के लिए काफी महंगी एमीवेंटामैब नाम की एक विशेष दवा की जरूरत है, केवल छह महीने के इलाज में करीब 64 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का खर्च आता है. इसी कारण उनके परिवार को लोगों से आर्थिक मदद मांगनी पड़ी. माइकल की दो बेटियां कैटलिन नोब्स और जैमी नोब्स हैं. कैटलिन खुद एक हॉकी खिलाड़ी हैं.

इलाज के लिए एक क्राउडफंडिंग पोर्टल के जरिए मदद

दोनों बहनों ने 31 अगस्त 2025 को अपने पिता के इलाज के लिए एक क्राउडफंडिंग पोर्टल के जरिए मदद की अपील की. इस अभियान से करीब 75 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जुटाए गए लेकिन इसके बावजूद इलाज पूरी तरह सुचारु रूप से नहीं चल पा रहा है. कैटलिन नोब्स ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता फिलहाल सिडनी में रहते हैं, जबकि वे खुद पर्थ में हैं. दोनों शहरों के बीच करीब पांच घंटे की फ्लाइट दूरी है, जिससे दूर रहकर मदद करना और भी मुश्किल हो जाता है.

माइकल में अब भी जीने की मजबूत इच्छाशक्ति

पिता की सेहत को लेकर बात करते हुए कैटलिन ने कहा कि इलाज चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन माइकल नोब्स में अब भी जीने की मजबूत इच्छाशक्ति है. उन्होंने बताया कि उनके पिता को उन्हें हॉकी खेलते देखना बहुत अच्छा लगता है और इससे उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कैटलिन ने कहा कि हॉकी से ज्यादा उनके बीच पिता-बेटी का रिश्ता अहम रहा है. चाहे वह अच्छा खेलें या बुरा, उनके पिता हमेशा उनके सबसे बड़े समर्थक रहे हैं.

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