New Delhi: सऊदी अरब ने हूतियों से निपटने के लिए तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक मल्टीनैशनल मैरीटाइम डिफेंस कोएलिशन MMDC गठबंधन खड़ा कर दिया है, जो यमन विद्रोहियों पर नकेल कसेगा. सऊदी ने आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान कर दिया है. इस नए सैन्य गठबंधन का मकसद लाल सागर, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
लंबी बैठक के बाद ऐलान
जेद्दा स्थित वेस्टर्न फ्लीट कमांड में हुई लंबी बैठक के बाद इसका ऐलान किया गया, जिसमें 15 सदस्य हैं. इनमें से 13 देश कानूनी तौर पर इसमें शामिल हो चुके हैं, जबकि दो सदस्य अभी औपचारिकताओं को पूरा कर रहे हैं. यह सैन्य संगठन इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में हूतियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगा दिया था. दो जहाजों पर हमला भी किया गया था, कथित तौर इसके बाद सऊदी को अपने कई जहाजों का आवागमन रोकना पड़ा था.
अमेरिका और यूरोपीय देशों की बड़ी भूमिका
MMDC हाल के कुछ सालों में पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की संरचना में सबसे बड़े बदलावों में से माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि अब तक लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा में अमेरिका और यूरोपीय देशों की नौसेनाओं की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन यह नया गठबंधन अपनी सुरक्षा खुद करने जा रहा है. गठबंधन का मुख्य उद्देश्य लाल सागर, बाब अल-मंदेब और अदन की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और रणनीतिक समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना है.
सऊदी अरब के जेद्दा में मुख्यालय स्थापित
MMDC का मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में स्थापित किया गया है. यहां ज्वाइंट कमांड, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, कंबाइंग मैरीटाइम ऑपरेशंस सेंटर होगा. रॉयल सऊदी नेवल फोर्सेज के रियर एडमिरयल अब्दुल्ला बिन सलेम अल शेहरी इसके कमांडर बनाए गए हैं, जबकि पाकिस्तानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी को डिपटी कमांडर नियुक्त किया गया है. गठबंधन में पश्चिम एशिया, अफ्रीका और साउथ एशिया के देश शामिल हैं. इनमें सऊदी अरब, बहरीन, कतर, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र, जिबूती, सोमालिया, सूडान, कोमोरोस, पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये और यमन सरकार शामिल हैं.
किसी एक पर हमला बाकी दोनों देशों पर हमला
MMDC के समझौते के लिए सऊदी, अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था, इसे मक्का पैक्ट कहा जाता है. इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इस गठबंधन की रीढ़ सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान की साझेदारी को मान रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात और ओमान इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि यूएई हाल के वर्षों में अपनी स्वतंत्र समुद्री सुरक्षा रणनीति पर काम कर रहा है और वह सऊदी नेतृत्व वाले कमांड ढांचे में सीधे शामिल नहीं होना चाहता. वहीं ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और सैन्य गठबंधनों से दूरी बनाए रखता है.
इसे भी पढ़ें. रानी अवंती बाई लोधी की जयंतीः CM योगी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- उनका बलिदान हम सभी के लिए प्रेरणादायी