Nepal Flash Flood: नेपाल के उत्तरी इलाके में अचानक आए भीषण सैलाब ने ऐसा खौफनाक मंजर पैदा कर दिया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. तिब्बत की ओर से भोटेकोशी यानी लेन्दे खोला नदी में अचानक कई गुना बढ़े पानी ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी. तेज बहाव की चपेट में सीमा से सटा टिमुरे बाजार, रसुवा कस्टम नाका, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और दर्जनों वाहन आ गए.
पानी का वेग इतना जबरदस्त था कि जो चीजें उसके रास्ते में आईं, वे बहती चली गईं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस समय यह जलप्रलय आया, उस वक्त रसुवा और आसपास के इलाकों में बारिश तक नहीं हो रही थी. आसमान साफ था, लेकिन सुबह करीब 9 बजे नदी का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया. देखते ही देखते हालात ऐसे बिगड़े कि प्रशासन को रसुवा के साथ नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन समेत 5 जिलों में हाई-रिस्क अलर्ट जारी करना पड़ा.
बारिश नहीं हुई, फिर अचानक कहां से आया इतना पानी?
इस बाढ़ को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्थानीय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी तो नदी में अचानक इतना पानी कहां से आया. रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि स्थानीय स्तर पर बारिश नहीं होने के बावजूद सुबह करीब 9 बजे नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया. वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस भयावह सैलाब के पीछे तिब्बत के ऊपरी इलाके में किसी ग्लेशियर झील के फटने या किसी अस्थायी बांध के टूटने की घटना हो सकती है. फिलहाल नेपाल का हाइड्रोलॉजी विभाग इस जलप्रलय के सटीक स्रोत का पता लगाने में जुटा हुआ है.
टिमुरे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचा हेलीकॉप्टर भी नहीं उतर सका
हालात कितने खतरनाक थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया ‘एल्टीट्यूड एयर’ का रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी वहां लैंड नहीं कर सका. पायलट के मुताबिक, बाढ़ के पानी ने टिमुरे के स्थानीय हेलीपैड को पूरी तरह बहा दिया था. ऐसे में हेलीकॉप्टर के उतरने की जगह ही नहीं बची. ऊपर से देखने पर पूरा गांव पानी और मलबे के बीच दबा हुआ नजर आ रहा था. हालात को देखते हुए रेस्क्यू हेलीकॉप्टर को आखिरकार काठमांडू वापस लौटना पड़ा.
कुछ ही देर में बह गए वाहन और कस्टम नाका
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला. सीमा के पास मौजूद रसुवा कस्टम नाके की तरफ भी सैलाब पहुंच गया. यहां खड़े कंटेनर, ट्रक और कारें भी तेज बहाव की चपेट में आ गईं और नदी में समा गईं. टिमुरे बाजार में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. पानी और मलबे के तेज बहाव ने इलाके में मौजूद ढांचों को प्रभावित किया और पूरा क्षेत्र जलप्रलय के बीच घिर गया.
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर भी टूटा कहर
भोटेकोशी नदी के अचानक उफान का असर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी पड़ा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत कई अन्य हाइड्रोपावर और ऊर्जा परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. नदी का बहाव इतना तेज था कि परियोजनाओं और आसपास के इलाकों में मौजूद सामान और वाहन भी इसकी चपेट में आ गए. अचानक आई इस बाढ़ ने स्थानीय स्तर पर भारी नुकसान की स्थिति पैदा कर दी है.
अब त्रिशूली नदी के रास्ते नीचे की ओर बढ़ रहा खतरा
भोटेकोशी नदी में आया यह उफान अब त्रिशूली नदी के जरिए निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है. यही वजह है कि नदी के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है. हालात को देखते हुए हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरी राहत एवं बचाव व्यवस्था में जुटी हैं.
सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें मोर्चे पर
बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसियों और सेना ने मोर्चा संभाल लिया है. प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की कोशिशें तेज की जा रही हैं. प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है, क्योंकि नदी का पानी निचले क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है. इसके साथ ही अस्पतालों और स्थानीय प्रशासन को भी स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है.
चीन के अधिकारियों के संपर्क में नेपाल
इस अचानक आए जलप्रलय का स्रोत अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इसी वजह से नेपाल का हाइड्रोलॉजी विभाग तिब्बत की ओर से आने वाले पानी के स्रोत का पता लगाने में जुटा है. इसके लिए नेपाल के अधिकारी चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं. साथ ही सैटेलाइट डेटा की मदद से भी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में पानी अचानक भोटेकोशी नदी में कैसे पहुंचा. फिलहाल नदी के बढ़ते जलस्तर और निचले इलाकों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं. रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन में हाई-रिस्क अलर्ट के बाद प्रशासन की निगरानी और राहत तैयारियां बढ़ा दी गई हैं.