New Delhi: नेपाल में बाढ़ के बाद बरामद हुए शवों की पहचान करना चुनौती बनी हुई है. ऐसे में मदद के लिए भारत एक फॉरेंसिक टीम भेजेगा. यह टीम नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच करेगी. डीएनए जांच के जरिए शवों की सही पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. यह कदम बाढ़ में लापता लोगों के परिजनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी
नेपाल और चीन की सीमा पर आई भीषण बाढ़ और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. इस त्रासदी में अब तक मरने वालों का आंकड़ा 750 के पार पहुंच चुका है, जबकि करीब 3000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. लापता होने वालों में 275 भारतीय भी शामिल हैं. आपदा का सबसे भयावह असर नेपाल में देखने को मिला है, वहीं चीन में भी कम से कम 7 लोगों की जान गई है.
किसी जीवित व्यक्ति के मिलने की खबर नहीं
चीन के प्रभावित आपदा क्षेत्र में अब तक किसी जीवित व्यक्ति के मिलने की खबर नहीं है, जिससे बचाव दलों की चिंता बढ़ गई है. वहीं नेपाल में बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों पर भारी दबाव है. बाढ़ से प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर बेहद दर्दनाक है. कई इलाकों में घर और सड़कें मलबे और कीचड़ में तब्दील हो गए हैं. जीवित बचे लोग अपने उजड़े घरों में लौटकर जरूरी सामान और कीमती वस्तुओं की तलाश कर रहे हैं.
तबाही और दर्द की मार्मिक याद
एक नेपाली बच्ची का नाटकीय बचाव अभियान के बीच उम्मीद की किरण बना है. वहीं चीन के एक सीमा चौकी पर मिला बच्चे का खिलौना बनी परिवारों की तबाही और दर्द की मार्मिक याद दिला रहा है. इस बीच लापता लोगों के परिजन बेहद पीड़ादायक इंतजार में हैं. कई परिवार रोजाना अस्पतालों और मुर्दाघरों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि अपने प्रियजनों के बारे में कोई जानकारी मिल सके. अमेरिका समेत दुनिया के अलग-अलग देशों में परिवार अपने लापता यात्रियों की सुरक्षित वापसी की खबर का इंतजार कर रहे हैं.
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