North Korea Drone Incursion : एक बार फिर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच ठन गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर कोरिया ने साउथ कोरिया पर इस महीने जासूसी के मकसद से अपने इलाके में एक और ड्रोन उड़ाने का आरोप लगाया, जिसे सियोल ने पूर्ण रूप से नकार दिया है. मीडिया रिपोर्ट की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि नॉर्थ कोरियाई सेना ने जनवरी की शुरुआत में साउथ कोरियाई सीमावर्ती काउंटी गैंगवा के ऊपर “उत्तर की ओर बढ़ते हुए” एक ड्रोन को ट्रैक किया. इसके साथ ही उसे नॉर्थ कोरियाई शहर केसोंग के पास मार गिराया.
उनके इस बयान में कहा गया कि ड्रोन पर निगरानी उपकरण लगाए गए थे. मलबे के विश्लेषण से पता चला है कि इसमें सीमावर्ती क्षेत्रों सहित नॉर्थ कोरिया के महत्वपूर्ण ठिकानों की फुटेज स्टोर थी. इस मामले को लेकर प्योंगयांग का कहना है कि ड्रोन फुटेज स्पष्ट सबूत है कि विमान ने निगरानी और जासूसी के मकसद से हमारे हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की थी.
उत्तर कोरिया के सैन्य प्रवक्ता ने कहा
इस मामले को लेकर उत्तर कोरिया के सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि यह कथित घुसपैठ सितंबर में हुई घुसपैठ जैसी ही थी, जब अपने सीमावर्ती शहर पाजू के पास साउथ कोरिया ने ड्रोन उड़ाए थे. उन्होंने ये भी बताया कि अगर घुसपैठ जारी रही तो सियोल को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
इस उड़ान का कोई रिकॉर्ड नहीं- दक्षिण कोरिया
ऐसे में दक्षिण कोरिया ने कहा कि उसके पास इस उड़ान का कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके साथ ही रक्षामंत्री आन ग्यू-बैक ने स्पष्ट करते हुए कहा कि प्योंगयांग जिस ड्रोन की बात कर रहा है वो हमारी सेना द्वारा संचालित मॉडल नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि साउथ कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं.
घुसपैठों का अवैध रूप से इस्तेमाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण कोरिया पहले से ही 2024 के आखिर में नॉर्थ कोरिया के ऊपर कथित ड्रोन उड़ानों की जांच कर रहा है. बताया जा रहा है कि तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक येओल ने मार्शल लॉ लगाने की अपनी कोशिश के बहाने के तौर पर इन घुसपैठों का अवैध रूप से इस्तेमाल किया था. इसके साथ ही सियोल की सेना ने उस मामले में ड्रोन उड़ानों की पुष्टि नहीं की है.
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