इस्लामिक नाटो में शामिल होगा ईरान? शरीफ चौधरी बोले- सभी के लिए रास्ता खुला

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Pakistan Islamic Nato: ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ किए गए अपने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर नई महत्वकांक्षा जाहिर की है. दरअसल, पाकिस्तान इसे नाटो की तर्ज पर एक बड़ा इस्लामिक नाटो बनाना चाहता है. उसका कहना है कि इस समझौते में दूसरे देशों के शामिल होने पर कोई रोक नहीं है. यानी यदि ईरान जैसे देश भी इसके मकसद से सहमत हैं, तो उनके लिए भी इसमें शामिल होने का रास्ता खुला है.
बता दें कि पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने ईरान के इस रक्षा समझौते का हिस्सा बनने पर कहा कि समझौते में किसी दूसरे देश के शामिल होने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. यदि आप मक्का समझौते को ध्यान से पढ़ें, तो इसमें किसी के शामिल होने या न होने पर कोई रोक नहीं है. सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति की साझा सोच रखने वाले किसी भी देश का स्वागत है.’ हालांकि, इस दौरान उन्होंने यह भी साफ किया कि समझौते का दायरा बढ़ाने का फैसला पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के राजनीतिक नेतृत्व को ही करना होगा.

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

दरअसल, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 7 अगस्त को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी सबसे अहम शर्त यह है कि यदि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा. इसका मकसद सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है. वहीं, ईरान युद्ध के कारण इस समझौते की अहमियत बढ़ गई है. खाड़ी में लगातार संघर्ष फैल रहा है. हूती विद्रोही अब सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं. इसी आशंका के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दूसरे देश भी इस सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं.

ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका

बात दें कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस महीने दूसरी बार तेहरान पहुंचे थे. पाकिस्तानी सेना ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने की अपनी कोशिशों को लेकर सावधानी के साथ उम्मीद जताई है. अहमद शरीफ चौधरी का कहना है कि अगर पाकिस्तानी आर्मी चीफ दो बार ईरान जा रहे हैं, तो इसके पीछे कुछ सकारात्मक वजह जरूर होगी. हालांकि, उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ये भी कहा कि कुछ ताकतवर पक्ष ऐसे हैं, जो संघर्ष जारी रहने में अपना फायदा देखते हैं. ऐसे तत्व शांति की कोशिशों में बाधा डाल सकते हैं.
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