PoK में प्रदर्शनकारियों की मौत पर UN चिंतित, पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनी, तत्काल जांच कराने की भी मांग

New Delhi: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी अशांति और हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क ने क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की मौतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और तत्काल जांच कराने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान से स्थानीय लोगों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद शुरू करने का आग्रह किया है.

कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर

साथ ही इस महीने के अंत में होने वाले क्षेत्रीय चुनावों से पहले शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया. जिनेवा से जारी बयान के अनुसार, जून से अब तक PoK में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की मौत हुई है. इनमें अधिकांश प्रदर्शनकारी बताए गए हैं, जबकि कुछ कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के जवान भी मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि सभी मौतों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए.

आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित

पाकिस्तान प्रशासन ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया है. इसके बाद संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया. इस संगठन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि किसी नागरिक संगठन को अपराधी घोषित करना और जनसभाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठन बनाने के अधिकार जैसे मूलभूत मानवाधिकारों को प्रभावित करता है.

मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील

यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है. वोल्कर टुर्क ने कहा कि हिरासत में लिए गए JAAC नेताओं को वकील से मिलने, अपने परिवार से संपर्क रखने और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का पूरा अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान से कानून के शासन और मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की. संयुक्त राष्ट्र ने PoK में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई और पाकिस्तान से पूरे क्षेत्र में जल्द से जल्द इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बहाल करने की मांग की. संगठन का कहना है कि संचार सेवाओं पर रोक लोगों के अधिकारों को प्रभावित करती है.

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