New Delhi: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. पाक सैनिकों ने दो दिनों में 40 लोगों की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी. यहां चल रहे प्रदर्शनों के बीच 26 जुलाई को चुनाव की शुरुआत हुई. पहले चरण के दौरान ही यहां हिंसा और सुरक्षाबलों की कार्रवाई के दौरान इतने लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. इसके साथ ही कई अन्य लोगों के घायल होने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें सामने आई हैं.
पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल
इस घटनाक्रम के बाद मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. संयुक्त कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि 27 और 28 जुलाई के दौरान रावलकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया. संगठन का कहना है कि इस कार्रवाई में करीब 40 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए और अनेक लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार कर लिया गया.
कश्मीर में 100 से अधिक लोगों की मौत
UKPNP ने यह भी दावा किया कि 5 जून से अब तक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे मामले का संज्ञान लें और घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए कदम उठाएं. साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने की भी मांग की गई है.
रावलकोट में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा
एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से कहा गया है कि रावलकोट में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए और क्षेत्र में संचार सेवाएं तुरंत बहाल करे. एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासे ने कहा कि रावलकोट से सामने आ रही घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं.
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