Parliament Budget Session: संसद के बजट सत्र के दूसरा चरण की शुरुआत काफी हंगामेदार रही है. यहां विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने राज्यसभा को पश्चिम एशिया के हालात और वहां भारत सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों से अवगत कराया. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई.
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और हंगामे के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ‘हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. हमारा मानना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.’
नए डेवलपमेंट पर पीएम मोदी की करीब से नजर
जयशंकर ने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री लगातार नए डेवलपमेंट पर करीब से नज़र रख रहे हैं, और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं.’ इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि ‘सरकार मध्य पूर्व के घटनाक्रम का लगातार आकलन कर रही है. जनवरी में ही हमने एडवायजरी जारी की थी. ईरान छोड़ने के लिए हमने समय रहते जानकारी दी थी.
आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा बाहर
उन्होंने बताया कि हमारा दूतावास भारतीयों के संपर्क में है. ईरान में मौजूद छात्रों को दूतावास मदद कर रहा है. आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला गया. जो लोग क्षेत्र में फंसे हुए है उनके लिए सरकार हर कोशिश कर रही है. पीएम मोदी ने खुद खाड़ी देशों के नेताओं से बात की. ईरान के नेतृत्व के साथ संपर्क मौजूदा वक्त में मुश्किल है, मैने ईरान के विदेश मंत्री से बात की है
भारतीय विदेशमंत्री ने राज्यसभा के बाद लोकसभा को भी अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग और इस कारण पश्चिम एशियाई देशों में बिगड़े हालात से अवगत कराया. इस दौरान जयशंकर ने कहा कि ‘इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ कॉन्टैक्ट करना साफ तौर पर मुश्किल है… ईरान के विदेश मंत्री ने ईरानी वॉरशिप लावन को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत देने के इस इंसानी काम के लिए भारत को अपने देश की तरफ से धन्यवाद दिया है.’
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