दुनिया में जारी जंग से लेकर भारत की ग्रोथ स्टोरी तक… UN महासभा में एस जयशंकर ने दिया जोरदार भाषण

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

S Jaishankar: संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया भर में चल रहे युद्धों पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध चिंता का विषय है. मिडिल ईस्ट में संकट के हालात हैं.  इन युद्धों का असर दूसरे देशों पर, या यूं कहे कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.

यूक्रेन, खाड़ी और फिलिस्तीन पर साफ बात

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि संघर्ष और टकराव हमारी मुख्य चिंता बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि जंग के दौरान शांति बनाए रखने में विफलता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति को खतरे में डाल रही है और विकास को धीमा कर रही है. उन्होंने बताया कि इस समय युद्ध के प्रभाव दुनिया भर में महसूस किए जाते हैं.

उन्होंने कहा कि संघर्षों से दूर देशों को बिना किसी गलती के नुकसान उठाना पड़ रहा है. जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है. इस असेंबली को हालात की सच्चाई का सामना करना होगा. इस साल, हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं.

विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष, जो अब अपने 5वें साल में है, जो अभी भी उतना ही चिंताजनक है. जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए. भारत शांति लाने के लिए चल रही पहलों का समर्थन करता है. साथ ही, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा और भोजन तथा ऊर्जा की आपूर्ति पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है. भारत इस स्थिति को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है, खासकर भोजन और ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में. दुर्भाग्य से पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व में भी तनाव और हिंसा जारी है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि एक टिकाऊ और स्थायी शांति के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-देश समाधान) की आवश्यकता है.

दुनिया भर के देशों की चिंता भारत ने की

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि अगर दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है, तो हम वास्तव में एक खाई के किनारे जी रहे हैं. ऐसे में हमें खाई में धकेलने के लिए बस एक और कदम की जरूरत है. इसलिए, सब कुछ अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की मानसिकता ने संस्थानों को कमजोर किया है और बाधाएं पैदा की हैं. यह वित्त की दुनिया से लेकर बाजार तक पहुंच को सीमित करने, सप्लाई चेन को बाधित करने और तकनीक को रोकने तक फैला हुआ है. संसाधन और कनेक्टिविटी विशेष रूप से लाभ उठाने का जरिया बन गए हैं. नतीजतन, देश अब लाभ उठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हमला बर्दाश्त नहीं

डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि”मिडिल ईस्ट में जंग के बीच संघर्षों से दूर रहने वाले देशों को बिना किसी गलती के सज़ा भुगतनी पड़ रही है. वहीं जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है. इस सभा को हालात की असलियत का सामना करना होगा. इस साल, हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जो पहले से ही मुश्किल हालात को और बिगाड़ रहा है. हम लगातार जारी तनाव को लेकर बहुत चिंतित हैं. अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है. भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की अपील करता है. खाद की कमी और अब अनाज की आवाजाही में रुकावटें, ये सभी चिंता की बातें हैं. इसके अलावा, SDG (सतत विकास लक्ष्य) की प्रगति पर भी दबाव बढ़ रहा है. ग्लोबल साउथ के अधिकारों को भी गैर-बाज़ार प्रथाओं और बाज़ार तक पहुंच से रोककर कमज़ोर किया जा रहा है. तकनीक की जो प्रगति उम्मीद जगाने के लिए थी, वह अब चिंता का कारण बन गई है. भारत शांति लाने के लिए चल रही पहलों का समर्थन करता है.”

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