Saudi Iran diplomatic expulsion: सऊदी अरब ने कई ईरानी राजनयिक कर्मचारियों को देश से निकाल दिया है. इसकी जानकारी सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई, साथ ही आगे भी कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है. यह कदम तेहरान पर उसके अपने क्षेत्र, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सदस्य देशों और दूसरे अरब व इस्लामी देशों पर बार-बार हमले करने का आरोप लगाने के बाद उठाया गया है.
कथनी के अनुसार नहीं ईरान का व्यवहार
विदेश मंत्रालय ने उन कामों की कड़ी निंदा की जिन्हें उसने ‘ईरानी आक्रामकता की खुली मिसाल’ बताया. उन्होंने कहा कि सऊदी की संप्रभुता, नागरिकों के बुनियादी ढांचे, आर्थिक हितों और राजनयिक मिशनों को लगातार निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और ‘अच्छे पड़ोसी’ होने के नियम को तोड़ता है. ऐसे काम ‘बीजिंग घोषणा’ के उल्टे हैं और इस्लाम के सिद्धांतों के प्रति ईरान की घोषित प्रतिबद्धताओं को कमजोर करते हैं. साथ ही यह भी कहा कि ईरान का व्यवहार उसकी कथनी के अनुसार नहीं है.
24 घंटे के भीतर देश को छोड़ने का दिया आदेश
विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि लगातार हो रहे हमलों से तनाव और बढ़ने का खतरा है, और इससे ‘अभी और भविष्य में’ संबंधों पर काफी असर पड़ सकता है. मंत्रालय ने 9 मार्च, 2026 को जारी अपनी पिछली चेतावनी का भी जिक्र किया. मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि ईरानी मिलिट्री अटैशे, असिस्टेंट अटैशे और दूतावास के तीन अन्य कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्रेटा’घोषित कर दिया गया है, और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है. हालांकि ईरानी अधिकारियों की ओर से इसपर कोई टिप्पणी नहीं की गई है.
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों को बनाया निशाना
बता दें कि यह घोषणा 28 फरवरी को ईरानी ठिकानों पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने के बीच आई है. इन हमलों में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था. इसके बाद, ईरान ने इज़राइल और पूरे क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इन ठिकानों में बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य अड्डे शामिल थे.
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