‘हम अमेरिकी जनरलों को पैसे देकर बुलाते हैं’, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने किया बड़ा खुलासा, चीन की बढ़ी टेंशन

New Delhi: ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने पहली बार एक ऐसा खुलासा किया है, जो चीन की टेंशन बढ़ाने वाला है. ताइवान ने माना है कि अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के रिटायर्ड जनरल और दूसरे सैन्य व नागरिक कर्मचारी ताइवान के सबसे बड़े सालाना युद्धाभ्यास को देखने के लिए भेजे जाते हैं. इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाते हैं. इस कार्यक्रम के लिए 2026 और 2027 में कुल 82.4 मिलियन ताइवानी डॉलर यानी करीब 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बजट रखा गया है.

यह सिर्फ सैन्य अभ्यास देखने का मामला नहीं

इस खुलासे को चीन के लिए परेशानी बढ़ाने वाला इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि यह सिर्फ सैन्य अभ्यास देखने का मामला नहीं है, बल्कि ताइवान और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का संकेत भी है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने पिछले हफ्ते विधायिका में पेश की गई एक रिपोर्ट में बताया कि अनुअल असेसमेंट बाई सीनियर ऑब्जर्वर्स एंड एक्सचेंजेस कार्यक्रम के तहत अमेरिकी रिटायर्ड जनरल और सैन्य विशेषज्ञ हान कुआंग युद्धाभ्यास में वरिष्ठ पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होते हैं.

नागरिक कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी भेजा

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड की ओर से सैन्य पेशेवरों और नागरिक कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी भेजा जाता है. इस कार्यक्रम के लिए 2026 और 2027 में कुल NT$82.4 मिलियन का बजट तय किया गया है. इसमें से NT$41.219 मिलियन इस साल के लिए रखा गया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिकी पर्यवेक्षक युद्धाभ्यास को तय प्रशिक्षण लक्ष्यों के आधार पर परखते हैं और ताइवान की सेना की संयुक्त सैन्य अभियान क्षमता बेहतर बनाने के लिए सुझाव देते हैं.

हान कुआंग अभ्यास की अंतिम रिपोर्ट में शामिल

उनकी रिपोर्ट को हान कुआंग अभ्यास की अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाता है. इसके बाद इन निष्कर्षों का इस्तेमाल सेना की तैयारी और भविष्य की रणनीति बनाने में किया जाता है. यह जानकारी विपक्षी कुओमिन्तांग (KMT) की सांसद मा वेन-चुन की ओर से कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन, भेजे जाने वाले अधिकारियों के स्तर और इससे मिलने वाले लाभों पर सवाल उठाए जाने के बाद सामने आई. सांसदों ने बजट में से NT$1 मिलियन की राशि रोक दी और उसे जारी करने से पहले मंत्रालय से लिखित स्पष्टीकरण मांगा.

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