UN महासभा में एर्दोगन ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा, भारत ने तुर्किये के बयान को किया खारिज

New York: तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर भी शामिल है, का समाधान संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए. एर्दोगन का बयान ऐसे समय आया है जब तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग बढ़ा है.

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर

अगस्त 2026 में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की बात कही गई. एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि सभी विवादों, जिसमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल है, को संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाया जाए. उनका यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में आया.

महासभा के मंच से कश्मीर का उल्लेख

यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का उल्लेख किया है. उन्होंने 2025 में भी अपने संबोधन में कश्मीर के समाधान के लिए बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला दिया था. भारत ने उस समय उनके बयान को खारिज करते हुए कहा था कि कश्मीर से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय रूप से सुलझाए जाने चाहिए और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है. वहीं, 2024 में एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान जम्मू-कश्मीर का उल्लेख नहीं किया था.

महासभा में कश्मीर पर विस्तार से टिप्पणी

यह 2019 के बाद पहली बार था जब उन्होंने महासभा के अपने भाषण में इस मुद्दे को नहीं उठाया. एर्दोगन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर पर विस्तार से टिप्पणी की थी. इसके बाद उनके बयानों पर भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आती रही है. भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण एवं द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाना चाहिए. नई दिल्ली तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करती.

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