ईरान में जंग के बाद भी नहीं हो सकता तख्तापलट! तुर्की ने बताई तेहरान की छुपी ताकत

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US Iran Clash: ईरान में इन दिनों नाजुक हालात बनी हुई है. इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि अमेरिका जंग के बाद भी ईरान में तख्तापलट नहीं कर पाएगा. यदि उसे ऐसा लगता है कि एयरस्ट्राइक या जंग के जरिए ईरान की सत्ता बदली जा सकती है, तो यह कोरी कल्पना है. जंग से ईरान की सरकार कमजोर हो सकती है, लेकिन वहां की सत्ता नहीं बदली जा सकती है.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के दौरान तुर्की के विदेश मंत्री फिदान ने कहा कि ईरान में सरकार को बदलना आसान काम नहीं है. दूर से आपको लगता है कि सरकार काफी कमजोर है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है. तुर्की इसे भली-भांति समझता है. इसलिए हम चाहते हैं कि बातचीत से मुद्दे का समाधान हो जाए.

क्यों आसान नहीं सरकार को बदलना?

फिदान के मुताबिक, मिडिल ईस्ट अब एक और युद्ध के लिए तैयार नहीं है. क्‍योंकि फायदा इससे किसी को भी हो, लेकिन नुकसान मिडिल ईस्ट के देशों का ही होगा. ऐसे में वो कोई और जंग नहीं चाहते है. इसके अलावा, ईरान में राजशाही नहीं है. इसके उलट अरब के कई देशों में राजशाही परंपरा है. ईरान के जो सुप्रीम लीडर हैं, वो धर्म के मामलों में दखल देते हैं ना कि शासन के मामलों में. इसलिए वहां पर सुप्रीम लीडर के खिलाफ लोगों में कोई नाराजगी नहीं है.

तुर्की विदेश मंत्री के मुताबिक, ईरान में भले ही शासन को कमजोर किया जा सकता है, लेकिन उसे हटाया नहीं जा सकता है. ईरान के लोगों को मारकर वहां पर सरकार नहीं बदली जा सकती है. सरकार का स्ट्रक्चर काफी मजबूत स्थिति में है. साथ ही उनका ये भी कहना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जो यह बता सके कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है. मैं खुद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में गवर्नर रहा हूं. मैं यह कह सकता हूं कि ईरान फिलहाल कोई हथियार नहीं बना रहा है.

नीति खराब पर अमेरिका को क्या मतलब?

फिदान ने कहा कि ईरान में सरकार चलाने की नीति काफी खराब है. वहां के लोग परेशान हैं, लेकिन इससे अमेरिका को क्या मतलब है? लोग तो और भी कई देशों में परेशान हैं? वहां अमेरिका तो कुछ भी नहीं कर रहा है. ऐसे में फिदान का कहना है कि ईरान में समय पर चुनाव कराए जाते है और चुनी हुई सरकार के पास ही आर्थिक समस्‍याओं को हल करने का साधन है.

उन्होंने यह भी कहा कि तुर्की जंग में अमेरिका की कोई मदद नहीं करेगा. हम शांति चाहते हैं. राष्ट्रपति एर्दोआन खुद इस काम में एक्टिव हैं. शांति को लेकर जो भी होगा, हम उसे करेंगे.

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