US Tariff: अमेरिका के एक सांसद ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें भारत सहित रूस के बड़े कारोबारी साझेदार देशों के नाम कानून में शामिल करने की मांग की गई है. दरअसल, ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ नाम के इस विधेयक को पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने पास किया था, जिसका मकसद रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है. साथ ही उन जहाजों के ‘शैडो फ्लीट’ यानी गुप्त बेड़े पर भी प्रतिबंध लगाना शामिल है, जिनकी मदद से रूस तेल बेचने पर लगी पाबंदियों से बचता है.
दरअसल, अमेरिका का कहना है कि रूस कच्चा तेल बेचकर जो पैसा कमा रहा है, उसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जा रहा है. ऐसे में इस विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव है कि वह रूस के बड़े तेल खरीदार देशों पर 100% तक शुल्क (टैरिफ) लगा सकें, जिसमें भारत और चीन भी शामिल हैं.
कानून में शामिल हैं किन किन देशों के नाम
बता दें कि 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट से पास हुए इस विधेयक में रूस के कारोबारी साझेदार देशों के नाम नहीं दिए गए, लेकिन इसमें दुनिया में मात्रा के हिसाब से तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों का जिक्र किया गया है. वहीं, अब इस विधेयक को राष्ट्रपति ट्रंप के पास भेजे जाने से पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी पास कराना जरूरी है. इस दौरान ध्यान देने वाली बात ये है कि अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं. उससे पहले प्रतिनिधि सभा में काम करने के लिए केवल 4 दिन ही बचे हैं.
भारत समेत 10 देशों के नाम जोड़ने की मांग
वहीं, अब डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने विधेयक में एक संशोधन पेश किया है, जिसमें उन देशों के नाम साफ तौर पर कानून में जोड़ने की मांग की गई है, जिन पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इन देशों में चीन, भारत, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल हैं.
ध्यान देने वाली बात ये है कि कुछ डेमोक्रेट सांसद ट्रंप को रूस के व्यापारिक पार्टनर देशों पर अधिक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का विरोध भी कर रहे हैं. इस बीच डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने एक अलग संशोधन पेश किया है, जिसमें विधेयक के ‘प्रावधान-113′ को पूरी तरह हटाने की मांग की गई है. इस प्रावधान में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक पार्टनर देशों पर व्यापक तौर पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है.
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
टैरिफ से जुड़े इस विधेयक का मकसद रूस के तेल और गैस कारोबार पर दबाव बढ़ाना है. भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम पर नई दिल्ली की नजर रहेगी.

