Venezuela: वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने गुरुवार को देश के नाम अपना पहला संदेश दिया. इस दौरान उन्होंने अमेरिका द्वारा पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने की खुलकर निंदा की. उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों पर एक धब्बा करार दिया. उन्होंने ऐतिहासिक शत्रुओं के बीच कूटनीतिक संबंधों को फिर से शुरू करने का भी समर्थन किया. उनका भाषण 44 मिनट का था और जिसका सुर सुलह-समझौते वाला था.
उनके पहले अमेरिका को लताड़ते रहते थे नेता
यह उनके पहले के नेताओं के अमेरिका विरोधी से काफी अलग था. वे घंटों लंबे भाषण देते थे और अमेरिका को लताड़ते रहते थे. निकोलस मादुरो के गिरफ्तार होने के बाद वेनेजुएला देश की कमान डेल्सी रोड्रिगेज के हाथ में है. वह मादुरो सरकार ने नंबर-2 थीं. रोड्रिगेज ने सरकार के नियंत्रण वाले तेल उद्योग को अधिक विदेशी निवेश के लिए खोलने की वकालत की.
वेनेजुएला के कच्चे तेल बिक्री पर नियंत्रण की बात
कार्यवाहक राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला के कच्चे तेल बिक्री पर नियंत्रण की बात कही है. अमेरिका द्वारा पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 3 जनवरी को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था. इसके लगभग दो हफ्ते बाद वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने पहली बार देश की नई राजनीतिक वास्तविकता के बीच अपना रुख स्पष्ट किया है.
अमेरिका के कार्यक्रम के साथ सहयोग का काफी दबाव
वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल उद्योग के पुनर्गठन में अमेरिका के कार्यक्रम के साथ सहयोग करने का काफी दबाव पड़ रहा है. इसी दरमियान रोड्रिगेज ने अपने पहले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में कहा कि वेनेजुएला में एक नई नीति बन रही है. उन्होंने देश के राजनयिकों से आग्रह किया कि वे इस बदलाव के बारे में विदेशी निवेशकों को सूचित करें. सांसदों से आग्रह किया कि वे तेल क्षेत्र में सुधारों को मंजूरी दें, जिससे विदेशी कंपनियों को वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार तक पहुंच सुनिश्चित हो सके.
खराब होते बुनियादी ढांचे की मरम्मत
रोड्रिगेज ने कहा कि तेल बिक्री से प्राप्त धन राष्ट्रीय बजट में जाएगा. इसका उपयोग संकट से जूझ रही स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा खराब होते बुनियादी ढांचे की मरम्मत में किया जाएगा. अधिकांश बुनियादी ढांचा पहले के नेता ह्यूगो शावे के शासनकाल में बनाया गया था और हाल के वर्षों में उपेक्षित रहा है. आज हालात यह हैं कि देश के अस्पताल इतने बदहाल हैं कि मरीजों से इलाज के लिए आवश्यक सामान सिरिंज से लेकर सर्जिकल स्क्रू तक खुद लाने को कहा जाता है.
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