Deepfake के बाद आई अब ClearFake की बला, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए चेतावनी

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Deepfake-ClearFake: सोशल मीडिया के दौर में डीपफेक (Deepfake) दुनिया भर में नया सिर दर्द बना हुआ है. इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ने जनता को आगाह किया है. दरअसल, डीपफेक एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसका दुरुपयोग करके किसी व्यक्ति का चेहरा दूसरे चेहरे से बदल दिया जाता है.

आपको बता दें कि हाल ही में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandana) और कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) को डीपफेक का शिकार बनाया गया. इस बीच एक और बला क्लियरफेक (ClearFake) को लेकर भी चेतावनी दी गई है. आइए जानते हैं क्या है क्लीयर फेक.

ClearFake क्या है?
Deepfake की ही तरह ClearFake भी है. इसमें भी ठग AI (Artificial Intelligence) के जरिए लोगों को फेक वेबसाइट, फोटो, वीडियो का यूज करके शिकार बनाते हैं. इसके लिए ठग क्लियरफेक का इस्तेमाल कर अपने शिकार को फोन में गलत सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करने को कहते हैं. इसके बाद सिस्टम से उनका पर्सनल डेटा चुराकर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं.

एक रिसर्चर्स ने इस साल की शुरुआत में एएमओएस (एटॉमिक macOS) स्टीलर की खोज की थी, जो बहुत खतरनाक है. ये एक ऐसा मैलवेयर है, जो ज्यादातर एप्पल यूजर्स को शिकार बनाता है. दरअसल, जब यूजर के सिस्टम में एएमओएस इनस्टॉल हो जाता है, तो ये उपयोगकर्ता की सारी इन्फॉर्मेशन निकाल लेता है. इसमें क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, iCloud, क्रिप्टो वॉलेट और किचेन पासवर्ड जैसी कई फाइलें शामिल होती हैं.

एक बड़ा साइबर खतरा है
आपको बता दें कि यूजर्स के लिए ये मैलवेयर पहले से ही बड़ा खतरा था, लेकिन अब क्लियरफेक का इस्तेमाल कर ठग इसे लोगों के सिस्टम में इनस्टॉल कर रहे हैं. इसमें ठग फेक वेबसाइट बनाकर लोगों को ब्राउजर अपडेट करने का आग्रह करते हैं. वहीं, फेक वेबसाइट को ठग इस तरह डिजाइन करते हैं कि उपयोगकर्ता को वेबसाइट असली लगे.

भ्रम के चलते वो जैसे ही इसे अपने सिस्टम में इनस्टॉल करते हैं. सिस्टम एटॉमिक macOS यूजर्स का पर्सनल डेटा इकट्ठा कर लेता है. इसके बाद ठग यूजर्स को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं. पर्सनल डेटा को इकट्ठा करके ठग लोगों को टारगेट करना शुरू करते हैं.

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ऐसे रहें सुरक्षित

  • ऐसे तमाम साइबर खतरों से सुरक्षित रहने के लिए कोई सॉफ्टवेयर ऑफिशियल वेबसाइट से इनस्टॉल करें. कभी भी सॉफ्टवेयर को थर्ड पार्टी या वेबसाइट से डाउनलोड न करें.
  • सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करते रहें.
  • कुछ ऐप्स ऐसे होते हैं, जो आपसे एएमओएस गेटकीपर सुरक्षा को बायपास करने की मांग करते हैं. उसे ओके करके कभी भी इनस्टॉल न करें. सावधान रहें!
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