नेपाल-फ्रांस के बाद अब इंग्लैंड में मची तबाही, सड़कों पर लाखों लोगों ने…, कई पुलिसकर्मी भी हुए घायल

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UK Protest : वर्तमान समय में ब्रिटेन के कट्टरपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित ‘यूनाइट द किंगडम’ मार्च में लगभग एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए. इतना ही बल्कि रैली के दौरान तब हिंसा भड़क गई, जब रॉबिन्सन समर्थकों का एक समूह पुलिस और काउंटर-प्रोटेस्टर्स से भिड़ गया. इस हिंसा के दौरान पुलिस पर बोतलें फेंकी गईं, अफसरों को लात-मुक्के बरसाए गए. बता दें कि रैली के दौरान हालात बिगड़ने पर दंगा-रोधी दस्ते को तैनात करना पड़ा.

रैली में कई पुलिसकर्मी हुए घायल  

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इस रैली में 26 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से चार काफी गंभीर रूप से जख्मी हैं. इतना ही नही बल्कि एक अधिकारी को रीढ़ की चोट आई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में शामिल अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, इसके साथ ही आगे की कार्रवाई और जांच जारी है.

असिस्टेंट कमिश्नर मैट ट्विस्ट ने कहा

इस मामले को लेकर असिस्टेंट कमिश्नर मैट ट्विस्ट का कहना है कि “ काफी लोग थे जो शांति से बात करना चाहते थे, लेकिन अधिक लोग बड़ी संख्या में हिंसा फैलाने की नीयत से पहुंचे थे. इसके साथ ही उन्होंने पुलिस पर हमला किया और कानूनी तौर पर सुरक्षा के नियमों को उल्‍लंघन करते हुए घेरे को तोड़ने की कोशिश की.”

रैली में उम्‍मीद से ज्‍यादा हुई भीड़

आंकड़ो के मुताबिक, इस रैली में 1 लाख 10 हजार से एक लाख 50 हजार लोग शामिल हुए, वहीं इसके जवाब में मार्च अगेंस्ट फासिज्म नाम से आयोजित रैली में करीब 5,000 लोग जुटे. इसके साथ रही वहां उपस्थित‍ लोगों ने “शरणार्थियों का स्वागत है” और “फार-राइट को खत्म करो” जैसे नारे लगाए.

नेताओं ने हिंसा को लेकर दी प्रतिक्रिया

इस दौरान इस मामले को लेकर फ्रांस के फार-राइट नेता एरिक ज़ेमूर ने कहा कि पहले से ही यूरोप पर मुस्लिम देशों से कॉलोनाइजेशन हो रहा है. वहीं, दूसरी ओर एलन मस्क ने वीडियो मैसेज भेजकर ब्रिटेन की लेफ्ट-लीनिंग सरकार पर हमला किया और ये भी कहा कि अनियंत्रित प्रवास ब्रिटेन को खत्म कर रहा है.

नेपाल-फ्रांस में राजनीतिक उथल-पुथल

जानकारी देते हुए बता दें कि हाल ही नेपाल और फ्रांस में बड़े पैमाने पर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल देखने को मिली है. ऐेसे में नेपाल में युवा आंदोलनकारियों ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के साथ राजशाही की वापसी की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया, इसके साथ ही फ्रांस में आपत्तिजनक कानून और आर्थिक नीतियों के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही है. दोनों देशों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण शुरुआत के बाद हिंसक रूप ले गए, जिसमें संपत्ति को नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हुए.

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