Pakistan : पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल (SIFC) की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और संरचना पर गंभीर सवाल उठाए हैं. बता दें कि यह काउंसिल सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की अगुवाई में बनाई गई थी, ताकि देश में विदेशी निवेश लाया जा सके, आपको ये भी बता दें कि IMF के मुताबिक यह अब तक अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाई है.
जानकारी के मुताबिक, IMF ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि SIFC की सालाना रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ऐसे में इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उसने कितने निवेश लाए और किन प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ. इस मामले को लेकर IMF ने कहा कि यह संस्था बिना किसी संवैधानिक दर्जे के काम कर रही है. इसके साथ ही अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने में सक्षम नहीं है.
विदेशी निवेश लाने में नाकाम SIFC
बता दें कि तीन साल बीत जाने के बाद भी SIFC कोई बड़ा विदेशी निवेश लाने में नाकाम रही है. इतना ही नही बल्कि कई विदेशी कंपनियां पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट चुकी हैं, इनमें फाइजर, प्रोक्टर एंड गैंबल, शेल, टेलेनर, करीम, सनोफी-एवेनटिस, और एली लिली जैसी बड़ी कंपनियां शामिल भी हैं.
SIFC में सेना की भूमिका प्रमुख
जानकारी के मुताबिक, SIFC में सेना की भूमिका काफी प्रमुख है. ऐसे में इसे लेकर IMF और आर्थिक विश्लेषकों ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अगर गलत आर्थिक फैसले हुए तो कोई भी संस्था उसकी जिम्मेदारी नहीं लेगी.
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब
इमरान खान सरकार के जाने के बाद से पाकिस्तान की हालत खराब होती जा रही है, देश में महंगाई बढ़ रही है और विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है ऐसे में रुपया लगातार कमजोर हो रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार काउंसिल के नेशनल कोऑर्डिनेटर लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज अहमद ने भी यह स्वीकार किया कि भारी टैक्स और सुपर टैक्स जैसी नीतियां आर्थिक विकास को रोक रही हैं. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान को अपने आर्थिक मॉडल और निवेश नीतियों में सुधार करना होगा.
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