ईरान-पाक ने पैंतीस सौ से ज्यादा अफगान शरणार्थियों को जबरन बाहर निकाला, बुनियादी अधिकारों से भी रहे वंचित

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Kabul: ईरान और पाकिस्तान ने एक ही दिन में पैंतीस सौ से ज्यादा अफगान शरणार्थियों को बाहर निकाल दिया है. गुरुवार को X पर तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने इसकी जानकारी दी. X पर प्रवासियों के मुद्दों के उच्चायोग की रिपोर्ट शेयर करते हुए बताया कि शनिवार को ईरान और पाकिस्तान से (745 परिवार) जिनमें 3,513 लोग शामिल थे, हजारों को जबरन अफगानिस्तान भेजा गया.

बुनियादी अधिकार तक नहीं दिए जाते

अफगान अखबार हश्त-ए-सुभ डेली की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों को उनके बुनियादी अधिकार तक नहीं दिए जाते. वे लगातार खौफ के साये में जीते हैं. मानवाधिकार समूह शरणार्थियों के प्रति सरकार के रवैए पर भी कुछ बोलने से परहेज करते हैं. यह घटना 2025 में दोनों देशों द्वारा अफगान शरणार्थियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन की श्रृंखला का हिस्सा है, जहां अब तक लाखों लोग वापस भेजे जा चुके हैं.

तोरखम क्रॉसिंग के रास्ते पहुंचे अफगानिस्तान

उन्होंने कहा कि अफगान प्रवासी कंधार में स्पिन बोल्डक, हेलमंद में बहरामचा, हेरात में इस्लाम कला क्रॉसिंग, निमरोज में पुल-ए-अब रेशम और नंगरहार में तोरखम क्रॉसिंग के रास्ते अफगानिस्तान पहुंचे. फितरत ने बताया कि 627 परिवारों (जिनमें 3,487 लोग शामिल थे) को उनके इलाकों में ले जाया गया. जबकि 660 परिवारों को अफगानिस्तान की सीमा में दाखिल होने के साथ ही मानवीय सहायता दी गई.

शरणार्थियों को 714 सिम कार्ड बांटे

उन्होंने आगे बताया कि संचार कंपनियों ने अफगानिस्तान लौटे शरणार्थियों को 714 सिम कार्ड बांटे. मंगलवार को ईरान और पाकिस्तान से 3ए610 अफगान प्रवासियों को जबरन वापस भेज दिया गया था. पिछले महीने पाकिस्तान से हाल ही में स्वदेश लौटे कई अफगान प्रवासियों ने कहा कि उन्हें सर्दियों के मौसम में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय मीडिया ने बताया कि उन्होंने आश्रय की कमी, सर्दियों में मदद की जरूरत और इलेक्ट्रॉनिक आईडी कार्ड (तजकिरा) बनवाने में आ रही दिक्कतों का जिक्र किया था.

अफगान शरणार्थियों पर बढ़ा दबाव

पिछले कुछ महीनों से तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी रहने के कारण इस्लामाबाद ने अफगान शरणार्थियों पर दबाव बढ़ा दिया है. पाकिस्तानी सेना इस्लामाबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में हर दिन प्रवासियों को बड़े पैमाने पर परेशान कर रही है. बिना वीजा के अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी से जुड़े आधिकारिक अभियानों के अलावा सादे कपड़ों में लोग रिहायशी इलाकों में प्रवासियों से पैसे वसूलते हैं. अफगानी कहते हैं कि वे डर और चिंता से भरे अमानवीय हालात में रहने को मजबूर हैं, जहां उनके शरणार्थी अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता है.

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