Saudi-UAE Tension: यमन में चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार को हवाई हमले कर यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद के ठिकानों को निशाना बनाया है. इन हमलों में कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की गई है. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब संयुक्त अरब अमीरात ने हाल ही में यमन से अपनी सैन्य मौजूदगी खत्म करने की घोषणा की थी.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, हवाई हमले हद्रामौत प्रांत के सेइयून और अल-खाशा इलाकों में स्थित सैन्य ठिकानों पर किए गए. हमलों में एक सैन्य अड्डे और हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में हवाई गतिविधियां ठप हो गईं. कई घंटों तक किसी भी विमान की आवाजाही नहीं हो सकी, जिससे आम नागरिकों में भी डर का माहौल बन गया. दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि मारे गए सभी लोग उनके लड़ाके थे, जो इन सैन्य ठिकानों पर तैनात थे. यह पहली बार है, जब हाल के महीनों में सीधे STC के ठिकानों को निशाना बनाया गया है.
इन हवाई हमलों से पहले यूएई ने घोषणा की थी कि उसने यमन से अपनी अंतिम सैन्य टुकड़ी भी वापस बुला ली है. अबू धाबी ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में तनाव कम करना चाहता है. हालांकि, इससे पहले मुकल्ला बंदरगाह पर हुए हमले को लेकर विवाद भी सामने आया था, जहां कथित तौर पर हथियारों की खेप को निशाना बनाया गया. यूएई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह केवल वाहनों की खेप थी.
दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद के नेताओं ने सऊदी समर्थित बलों पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सैन्य ठिकानों को शांतिपूर्ण तरीके से अपने नियंत्रण में लेने की बात कही गई थी, लेकिन इसके तत्काल बाद हवाई हमले कर दिए गए. STC के एक प्रवक्ता ने इसे अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि वे कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं.
वहीं, हद्रामौत प्रांत के सऊदी समर्थित प्रशासन का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक या सामाजिक समूह के खिलाफ नहीं, बल्कि इसका मकसद सैन्य ठिकानों पर कब्जा जमाना है. सऊदी सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर STC ने अपने लड़ाके वापस नहीं हटाए तो हमले जारी रह सकते हैं.
लगभग एक दशक पुराना है यमन में चल रहा गृहयुद्ध
यमन में चल रहा गृहयुद्ध लगभग एक दशक पुराना है. इस संघर्ष में सऊदी अरब और यूएई एक ही गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद अलग-अलग स्थानीय गुटों का समर्थन करते रहे हैं. उत्तर यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही अब भी मजबूत स्थिति में हैं, जबकि दक्षिण और पूर्वी इलाकों में सत्ता को लेकर लड़ाई जारी है.

