New Delhi: भारतीय दंपति सचिन अवस्थी और उनकी पत्नी को दक्षिण कोरिया के जेजू आइलैंड पर एंट्री से रोककर उन्हे डिटेंशन में रखा गया. आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें एंट्री से रोका गया, मानसिक दबाव बनाया गया और ब्लैकमेल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा. मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने Ministry of External Affairs (MEA) से हस्तक्षेप की मांग की है.
सोशल मीडिया पर वीडियो में दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Abhishek Anand की एक पोस्ट के बाद यह मामला चर्चा में आया. पोस्ट में दावा किया गया कि भारतीय नागरिक Sachin Awasthi और उनकी पत्नी पर्यटन के लिए दक्षिण कोरिया के लोकप्रिय पर्यटन स्थल Jeju Island गए थे. भारतीय इन्फ्लुएंसर Sachin Awasthi ने सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में दावा किया है कि उन्हें और उनकी पत्नी को दक्षिण कोरिया और चीन में कुल 38 घंटे तक डिटेंशन में रखा गया.
मौजूद थे सभी जरूरी दस्तावेज
अवस्थी के मुताबिक, वे पर्यटन के लिए दक्षिण कोरिया के Jeju Island पहुंचे थे. उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया. पोस्ट के अनुसार, दंपति के पास वैध पासपोर्ट, वीजा (यदि आवश्यक), होटल बुकिंग और रिटर्न टिकट जैसे सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे. इसके बावजूद दक्षिण कोरिया के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया, जहां कई घंटे तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया.
नस्लीय भेदभाव जैसा लगा यह व्यवहार
वीडियो में उन्होंने दावा किया कि यह व्यवहार नस्लीय भेदभाव जैसा लगा. अवस्थी का कहना है कि भारत लौटते समय चीन के ट्रांजिट एयरपोर्ट पर भी उनके साथ सख्त व्यवहार किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां लगातार निगरानी रखी गई, वॉशरूम उपयोग के दौरान गोपनीयता नहीं दी गई व सुरक्षा कर्मियों का रवैया अपमानजनक था. उन्होंने यह भी दावा किया कि इंडोनेशियाई यात्रियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया.
ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं
कुछ पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जेजू में भारतीय दूतावास या हेल्पलाइन से संपर्क क्यों नहीं हो पाया. यूजर्स ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया भारत में अपने फैशन, मोबाइल फोन और K-ड्रामा के जरिए बड़ा बाजार पाता है, लेकिन भारतीय पर्यटकों के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. अब तक दक्षिण कोरिया या चीन की इमिग्रेशन अथॉरिटीज की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.
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