New Delhi: अफगानिस्तान और म्यांमार में एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से धरती कांप उठी हैं. हाल के दिनों में दोनों देशों में कई भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे पहले से संकटग्रस्त आबादी के लिए खतरा और बढ़ गया है. बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि बड़े भूकंपों के बाद विस्थापित लोगों में टीबी, HIV और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है.
10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया अफगानिस्तान में भूकंप
अफगानिस्तान में रविवार को 4.1 तीव्रता का भूकंप आया. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार यह भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जिससे आफ्टरशॉक्स और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है. भूकंप का केंद्र 33.74° उत्तरी अक्षांश और 65.70° पूर्वी देशांतर पर स्थित था. इससे पहले 15 जनवरी को 4.2 तीव्रता का भूकंप 96 किमी गहराई पर और 14 जनवरी को 3.8 तीव्रता का भूकंप 90 किमी गहराई पर दर्ज किया गया था.
अफगान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील
रेड क्रॉस के अनुसांर अफगानिस्तान विशेष रूप से हिंदूकुश क्षेत्र में स्थित होने के कारण बार-बार भूकंप झेलता है. यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट की सीमा पर है. UNOCHA ने चेतावनी दी है कि दशकों के संघर्ष और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है. म्यांमार में भी रविवार को 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 65 किलोमीटर थी.
उथले भूकंप अधिक खतरनाक
NCS के अनुसार इसका केंद्र 23.70° उत्तरी अक्षांश और 93.79° पूर्वी देशांतर पर था. विशेषज्ञों के अनुसार उथले भूकंप अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी तरंगें सीधे सतह तक पहुंचती हैं और ज्यादा तबाही मचा सकती हैं. म्यांमार चार टेक्टोनिक प्लेटों भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के संगम पर स्थित है. यहां से गुजरने वाला 1,400 किमी लंबा सागाइंग फॉल्ट देश के प्रमुख शहरों सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, जहां लगभग 46% आबादी रहती है.
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