India GDP Growth 2025: भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है, जहां GDP ग्रोथ रेट 7.4% रहने का अनुमान जताया गया है. यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ओर से सोमवार को जारी मार्केट पल्स रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के दौरान मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति, निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और पूंजी बाजार में कंपनियों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाने की गतिविधियों ने आर्थिक मजबूती को समर्थन दिया है.
मजबूत घरेलू मांग से भारत की ग्रोथ आगे
जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, स्थिर घरेलू मांग और सरकारी खर्च के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि वैश्विक समकक्षों से काफी आगे रही. दूसरी तरफ महंगाई भी काबू में रही है और आरबीआई की ओर से निर्धारित किए गए महंगाई के बैंड से नीचे बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक को रेपो रेट में 125 आधार अंकों की कटौती करने का मौका मिला है. मजबूत सर्विसेज निर्यात के कारण भारत के एक्सटर्नल सेक्टर की स्थिति मजबूत बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के आंकड़े के आसपास बना हुआ है.
2025 में पूंजी बाजार में रिकॉर्ड फंडिंग
रिपोर्ट के अनुसार, पूंजी बाजारों में रिकॉर्ड स्तर पर फंडिंग दर्ज की गई है. वर्ष 2025 में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों ने करीब 19.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और पिछले साल की तुलना में लगभग 10% अधिक है. यह राशि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर को मिले नेट बैंक क्रेडिट से दोगुनी से भी ज्यादा रही. कुल जुटाई गई राशि में से 15.1 लाख करोड़ रुपये डेट मार्केट के माध्यम से, जबकि 4.2 लाख करोड़ रुपये इक्विटी मार्केट से प्राप्त हुए.
IPO में भारत ग्लोबल लीडर
भारत इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) में भी ग्लोबल लीडर बनकर उभरा. साल के दौरान एनएसई पर कुल 220 आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे 1.78 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए. बाजारों में निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. यूनिक निवेशकों की संख्या बढ़कर 12.5 करोड़ हो गई, जबकि कुल क्लाइंट अकाउंट 24 करोड़ के पार हो गए हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में नए निवेशकों की संख्या घटकर 1.6 करोड़ रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2.3 करोड़ था.
हालांकि, इसे बाजार से निवेशकों की निकासी के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे निवेश गतिविधियों के सामान्य स्तर पर लौटने का संकेत माना गया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल निवेशक खातों में लगभग 70% की वृद्धि दर्ज की गई है.
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