ग्रीनलैंड सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, रूस-चीन पर भी रहेगी US की नजर, ट्रंप के इसी जिद से परेशान हैं यूरोपीय देश!

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New Delhi: अमेरिका की नजरें दशकों से ग्रीनलैंड पर टिकी हुई हैं. अमेरिका खुलकर ग्रीनलैंड को अपने हितों से जोड़कर देख रहा है. ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से भले ही उत्तरी अमेरिका के पास हो लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है. 19वीं सदी से ही अमेरिका की नजर इस द्वीप पर रही है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने यहां सैन्य मौजूदगी बनाई और बाद में भी आर्कटिक सुरक्षा के नाम पर अपनी भूमिका बनाए रखी.

रूस और चीन पर नजर रखने के लिए लोकेशन है ग्रीनलैंड

हाल के वर्षों में जब आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते और प्राकृतिक संसाधनों की संभावना बढ़ी तो ग्रीनलैंड की अहमियत और बढ़ गई. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है. यह रूस और चीन पर नजर रखने के लिए रणनीतिक लोकेशन है. यहां मौजूद अमेरिकी एयरबेस और रडार सिस्टम आर्कटिक सुरक्षा का अहम हिस्सा माने जाते हैं.

अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं

इसके अलावा दुर्लभ खनिज तेल और गैस की संभावनाएं भी अमेरिका की दिलचस्पी बढ़ाती हैं. यही वजह है कि अमेरिका इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता है. डेनमार्क साफ कर चुका है कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच ऐतिहासिक और संवैधानिक संबंध हैं. यूरोपीय यूनियन के कई देश इसे यूरोपीय संप्रभुता का सवाल मानते हैं और चाहते हैं कि अमेरिका किसी यूरोपीय क्षेत्र पर दबाव न बनाए.

ब्रिटेन और डेनमार्क के रिश्ते सामान्य

यूरोप में खुलकर डेनमार्क का विरोध कोई देश नहीं करता लेकिन रणनीतिक मजबूरियों के चलते कुछ देश अमेरिका के करीब दिख सकते हैं.  ब्रिटेन और डेनमार्क के रिश्ते सामान्य हैं, लेकिन ब्रिटेन की प्राथमिकता हमेशा US-UK स्पेशल रिलेशनशिप रही है. पोलैंड और बाल्टिक देश (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) देशों का मुख्य डर रूस है और अमेरिका इन्हें सुरक्षा की गारंटी देता है. डेनमार्क से इनका कोई गहरा टकराव नहीं है, लेकिन अगर मामला NATO और आर्कटिक सिक्योरिटी से जुड़ा होता है तो ये देश अमेरिका के पक्ष में खड़े दिख सकते हैं.

नॉर्वे सीधे डेनमार्क के नहीं जाएगा खिलाफ

नॉर्वे खुद आर्कटिक देश है और अमेरिका के साथ उसकी सैन्य साझेदारी मजबूत है. हालांकि नॉर्वे सीधे डेनमार्क के खिलाफ नहीं जाएगा, लेकिन आर्कटिक में अमेरिकी मौजूदगी बढ़ाने के विचार का वह विरोध भी नहीं करता है. कुछ पूर्वी यूरोपीय देश रोमानिया, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया जैसे देश अक्सर यूरोपीय यूनियन से ज्यादा अमेरिका की सुरक्षा नीति को प्राथमिकता देते हैं. ये ग्रीनलैंड पर खुला बयान न भी दें, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका को समर्थन मिल सकता है.

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