Washington: व्यापार समझौते में भारत अब अमेरिका से आगे निकल गया है, जो वॉशिंगटन के लिए चिंता का विषय बन गया है. बता दें कि ट्रंप सरकार की टैरिफ वाली रणनीति का कोई नतीजा नहीं निकल पाया है. वॉशिंगटन में हंगामा इस बात पर मचा है कि भारत ने इस साल डोनाल्ड ट्रंप से सौ फीसदी ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.
अमेरिकी सांसदों में बढ़ती निराशा
वेदा पार्टनर्स की को-फाउंडर हेनरीटा ट्रेज के अनुसार इस साल ट्रेड डील करने में भारत अमेरिका से आगे निकल गया है. ट्रेज ने अमेरिकी सांसदों में बढ़ती निराशा की ओर इशारा किया. ट्रंप सरकार व्यापार से जुड़ी आक्रामक बातों को ठोस समझौतों में नहीं बदल पा रही है. ट्रेज ने कहा कि अगर आपको याद हो तो जब वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट और यूएसटीआर जेमीसन ग्रीर वहां थे तो उन्होंने (ट्रंप) 90 दिनों में उन 90 समझौतों का वादा किया था.
अमेरिकियों को पसंद नहीं टैरिफ
असलियत उन उम्मीदों से बहुत कम रही है. हमारे पास 10 महीनों में दो डील हैं. वे कंबोडिया और मलेशिया के साथ हैं. उन्होंने आगे कहा कि सांसदों के लिए चिंता यह है कि अमेरिकियों को टैरिफ पसंद नहीं हैं. 50 फीसदी अमेरिकी चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें खत्म कर दे. इस विरोध ने सरकार के आर्थिक संदेश को मुश्किल बना दिया है. कोई भी ट्रेड समझौता नहीं हो रहा है. इससे ज्यादा चिंता पैदा हो रही है.
दक्षिण कोरिया डील नहीं बढ़ी आगे
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया डील आगे नहीं बढ़ी है. उन्होंने इस स्थिति को अमेरिकी सांसदों के लिए खास तौर पर परेशान करने वाला बताया. ट्रेज ने कहा कि व्यापार में अमेरिका से आगे चल रहे भारत की बात करें तो इस सरकार के आने से पहले दक्षिण कोरिया के साथ 96 फीसदी व्यापार मुक्त व्यापार समझौते के तहत कवर होता था. हमारे यहां जीरो परसेंट टैरिफ थे.
खास पार्टनर्स के साथ कोई कामयाबी नहीं
ट्रेज ने कहा कि सरकार का टैरिफ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने से खास पार्टनर्स के साथ कोई कामयाबी नहीं मिली है. ट्रंप ने पूरे साल ईयू, जापान और दक्षिण कोरिया पर जिस डंडे से हमला किया, उसका कोई फायदा नहीं हो रहा है. ट्रेज के मुताबिक राजनीतिक नतीजों से निपटने का दबाव पूरी तरह से व्हाइट हाउस पर है. राष्ट्रपति ट्रंप वोटरों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा दिलाना चाहते हैं इसलिए व्हाइट हाउस को इसका सामना करना होगा.
ट्रेड पॉलिसी अभी भी एक रुकावट
उन्होंने कहा कि ट्रेड पॉलिसी अभी भी एक रुकावट है. ये ट्रेड डील और टैरिफ अमेरिकी सोच पर भारी पड़ रहे हैं और राष्ट्रपति के नंबरों को नीचे ला रहे हैं. पूरे देश में रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस के नंबरों को नीचे ला रहे हैं. ट्रेज ने सुझाव दिया कि भले ही ट्रंप सरकार आर्थिक जुड़ाव के लिए अमेरिका के साथ सेल करो अप्रोच पर जोर दे रही है लेकिन रुकी हुई व्यापार वृद्धि के बड़े राजनीतिक असर को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है.
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