Heart Attack! दिल्ली में चौंकाने वाला मौतों का आंकड़ा, लाखों की गई जान, इसमें 14,000 बच्चों ने भी तोडा दम

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HealthTips: देश की राजधानी दिल्ली में 2024 में हार्ट अटैक और दिल से संबंधित बीमारियों की वजह से 34,539 मौतें हुईं हैं, जो पिछले साल की तुलना में 12,000 से ज़्यादा मौतें हैं, जब 22,385 मौतें दर्ज की गई थीं. यह आंकड़ें दिल्ली सरकार के हैं. आंकड़ों में यह भी पता चला कि पिछले दो दशकों में दिल्ली में 3,29,857 मौतें दिल के दौरे के कारण हुईं. दर्ज की गई कुल मौतों में से पांच प्रतिशत से अधिक (14,321) मौतें 14 वर्ष और उससे कम उम्र के लोगों की थीं.

25 से 44 वर्ष की आयु वर्ग में 46,129 मौतें

दिल्ली सरकार की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 25 से 44 वर्ष की आयु वर्ग में 46,129 मौतें दर्ज की गईं जबकि 45 से 64 वर्ष की आयु वर्ग में 1,03,972 लोगों की मौत दिल के दौरे से हुई और 65 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में 92,048 लोगों की मौत हुई. बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल की बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरिमा घोष के मुताबिक हालांकि वंशानुगत जोखिम महत्वपूर्ण बना हुआ है लेकिन जीवनशैली कारक अब शुरुआती दिल के दौरे में एक बड़ी और अधिक बदली जा सकने वाली भूमिका निभाते हैं.

बहुत कम उम्र में आनुवंशिक प्रवृत्ति सक्रिय

आनुवंशिकी बंदूक लोड कर सकती है लेकिन जीवनशैली ट्रिगर खींचती है. खराब आहार, निष्क्रियता, धूम्रपान, तनाव और नींद की कमी बहुत कम उम्र में आनुवंशिक प्रवृत्ति को सक्रिय कर सकती है. 2005 और 2024 के बीच दिल से संबंधित समस्याओं के कारण हुई कुल मौतों में से 2,10,206 पुरुष, 1,19,626 महिलाएं और 25 अन्य थे. अधिकतम 34,539 मौतें 2024 में दर्ज की गईं और न्यूनतम 8,236 मौतें 2010 में दर्ज की गईं.

पुरुष मौतों की संख्या महिला मौतों की संख्या से दोगुनी

आंकड़ों के आगे के विश्लेषण से पता चलता है कि 45-64 वर्ष की आयु वर्ग में दिल का दौरा/बीमारियों के कारण पुरुष मौतों की संख्या महिला मौतों की संख्या से लगभग दोगुनी थी. कुल 68,177 पुरुषों और 35,795 महिलाओं की मौतें दर्ज की गईं. आज के समय मेंए शुरुआती हार्ट अटैक में आनुवंशिक जोखिम की तुलना में लाइफस्टाइल फैक्टर ज़्यादा अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि जेनेटिक्स भी जोखिम बढ़ा सकते हैं लेकिन खराब आदतें ही इसके मुख्य कारण हैं.

जीवन में बहुत पहले ही दिल की सेहत को नुकसान

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट दिल्ली के कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. अमर सिंघल ने बताया कि कुछ फैक्टर जैसे कि सुस्त दिनचर्या, ज़्यादा स्क्रीन टाइम, खाने की खराब आदतें, धूम्रपान, वेपिंग, खराब नींद और ज़्यादा तनाव का स्तर जीवन में बहुत पहले ही दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाता है. हार्ट अटैक और संबंधित बीमारियों के कारण होने वाली संस्थागत मौतें 45-64 साल के आयु वर्ग में सबसे ज़्यादा थीं (38.55 प्रतिशत), इसके बाद 65 साल और उससे ज़्यादा आयु वर्ग (34.13 प्रतिशत) और 25 से 44 साल के आयु वर्ग (17.11 प्रतिशत) का नंबर आता है.

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