India-US Partnership: अमरीका के आर्थिक मामलों के विदेश उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने भातर और अमेरिका के बीच सहयोगों को और भी मजबूत बनाने का संकेत दिया है. हेलबर्ग ने कहा है कि अमेरिका अगले महीने फरवरी 2026 में अपनी तकनीकी पहल पैक्स सिलिका में भारत का स्वागत करने के लिए काफी उत्सुक है.
पैक्स सिलिका (Pax Silica) चीन पर निर्भरता घटाते हुए सेमीकंडक्टर और AI आपूर्ति चेन को मजबूत करने का काम करता है. ये एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूके, इजराइल, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और कतर जैसे देश शामिल हैं. ये सभी सदस्य देश चिप डिजाइन, विनिर्माण और AI अवसंरचना पर मिलकर काम करेंगे. इसका उद्देश्य वैश्विक तकनीकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है.
पैक्स सिलिका के पहले दौर से बाहर रहा भारत
ऐसे में भारत को ये भी देखना होगा चीन को वह अचानक इस मामले में पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकता. हालांकि अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका को लेकर औपचारिक बातचीत अभी होनी है. उससे पहले कई ऐसी बातें हैं, जिनपर ध्यान देना जरूरी है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि इसमें शामिल होने के लिए भारत को निमंत्रण देर से दिया गया है. जबकि, जापान सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और ग्रीस ने 12 दिसंबर को ही पैक्स सिलिका पर शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे. वहीं, बाद में नीदरलैंड्स, संयुक्त राष्ट्र अमीरात और कतर भी इसका हिस्सा बन गए.
चीन के प्रति भारत का नरम रुख
इस बीच, अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) ने घोषणा की है कि वह 17 फरवरी को भारत की अमेरिका और चीन के साथ रणनीतिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई आयोजित करेगा. यह सुनवाई 2026 रिपोर्टिंग साइकिल की पहली सार्वजनिक सुनवाई होगी, जिसका उद्देश्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भारत की स्थिति का आकलन करना है, जहां वाशिंगटन चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्तों में एक थोड़ा थोड़ा सुधार देखा जा रहा है. पीएम मोदी की सात साल बाद हुई बीजिंग यात्रा, पांच साल बाद फिर से शुरू हुई हवाई सेवा और गलवान संघर्ष के बाद चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में दी गई ढील पर अमेरिकी नीति निर्माता अपनी नजर बनाए हुए हैं.
अमेरिका के लिए इस सुनवाई का महत्व
बता दें कि पिछले एक दशक में वाशिंगटन ने भारत को चीन के खिलाफ एक ‘रणनीतिक काउंटरवेट’ यानी संतुलन बनाने वाली शक्ति के रूप में देखा है. हालांकि, पिछले एक साल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कुछ तनाव भी देखे गए हैं. ऐसे में अब सवाल ये है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बनाए रखते हुए अमेरिकी सुरक्षा ढांचे के साथ कितना तालमेल बिठा पाएगा.
यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ठीक छह सप्ताह बाद, अप्रैल 2026 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं.
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