ईरानी ड्रोन हमले के बाद कुवैत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग, खाड़ी के देशों ने की निंदा

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Iran Israel War: ईरानी ड्रोन हमले के बाद कुवैत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक मीना अल-अहमदी रिफाइनरी में भीषण आग लग गई. हालांकि इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन बड़ा नुकसान हुआ है. यह रिफाइनरी मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी इकाइयों में गिनी जाती है, जिसकी उत्पादन क्षमता करीब 7.3 लाख बैरल प्रतिदिन है. ये धमाके ईरान के जवाबी हमलों से जुड़े माने जा रहे हैं.

खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को बनाया निशाना

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने खिलाफ हुए हमलों के जवाब में कतर, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है. कतर के LNG हब में भी मिसाइल हमलों के बाद आग लग गई, जिसे बाद में बुझा दिया गया, लेकिन वहां पहले ही उत्पादन रोक दिया गया था और अब और नुकसान हुआ है. यूएई में हबशान गैस प्लांट और बाब ऑयल फील्ड को भी बंद करना पड़ा. अधिकारियों ने इसे खतरनाक उकसावा बताया है.

हमलों की कड़ी निंदा

कतर, सऊदी अरब और यूएई ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है. सऊदी अरब के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि इन हमलों से विश्वास पूरी तरह टूट गया है. अब यह साफ हो चुका है कि मिडिल ईस्ट की जंग एनर्जी वॉर में बदल गई है. तेल और गैस ठिकानों पर लगातार हमले न केवल क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकते हैं.

कतर के पास एक और जहाज क्षतिग्रस्त

खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर भी खतरा बढ़ गया है. यूएई के तट के पास एक जहाज में आग लग गई. कतर के पास एक और जहाज क्षतिग्रस्त हुआ. इसका मुख्य कारण Strait of Hormuz पर बढ़ता खतरा है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. इस बढ़ते संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा उछाल आया. वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

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