अमेरिका कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के TPS वाले फैसले पर लगाई रोक, लाखों हैती नागरिकों को मिली बड़ी राहत

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Haiti TPS: अमेरिका में एक फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत हैती के नागरिकों को मिली टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) खत्म की जा रही थी. कोर्ट के इस फैसले से अमेरिका में रह रहें करीब साढ़े तीन लाख हैती नागरिकों को राहत मिली है. अगर यह फैसला लागू हो जाता, तो हजारों लोगों को हिंसा और अराजकता से जूझ रहे हैती वापस भेजा जा सकता था.

बता दें कि सोमवार को वॉशिंगटन डी.सी. की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एना रेयेस ने गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के उस आदेश को रोक दिया, जो बुधवार से लागू होने वाला था. इस दौरान जज ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि इस फैसले के पीछे न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है, बल्कि नस्लीय भेदभाव की आशंका भी दिखती है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) एक अस्थायी मानवीय सुरक्षा होती है, जो उन देशों के नागरिकों को दी जाती है, जहां प्राकृतिक आपदा, युद्ध या असाधारण हालात हों. ऐसे में हैती को साल 2010 में आए भीषण भूकंप के बाद यह दर्जा मिला था और तक से अमेरिका ने कई बार इसे बढ़ाया. जुलाई 2024 में बाइडन प्रशासन ने हैती के हालात को देखते हुए TPS को फरवरी 2026 तक बढ़ाया था.

उस वक्त हैती में गैंग हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली चरम पर थी. लेकिन जनवरी 2025 में ट्रंप के सत्ता में लौटते ही इस सुरक्षा को खत्म करने की कोशिशें शुरू कर दीं. ऐसे में गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने पहले इसकी अवधि घटाने और बाद में पूरी तरह खत्म करने का फैसला लिया.

जज ने क्यों लगाई रोक?

जज एना रेयेस ने कहा कि यह काफी हद तक संभव है कि मंत्री नोएम ने पहले से ही TPS खत्म करने का मन बना लिया था और यह फैसला गैर-श्वेत प्रवासियों के प्रति शत्रुता से प्रेरित हो सकता है. साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि इस प्रक्रिया में न तो कानून का सही पालन हुआ और न ही अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन के तहत समान संरक्षण के अधिकार का सम्मान किया गया.

अभी भी सुरक्षित नहीं हैती

बता दें कि यह मामला हैती नागरिकों की ओर से दायर एक क्लास-एक्शन याचिका के जरिए अदालत तक पहुंचा था. वहीं, कोर्ट के इस फैसले का स्‍वागत करते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रही लॉ फर्म ने कहा कि हैती अब भी लौटने के लिए सुरक्षित नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ के अनुसार हैती में 60 लाख से ज्यादा लोग मानवीय मदद पर निर्भर हैं, जिनमें 33 लाख बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा, देश में गैंग हिंसा के चलते 14 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं और सरकार लगभग निष्क्रिय है. फिलहाल यह आदेश हैती के TPS धारकों के लिए बड़ी राहत है. वे अमेरिका में रहकर काम कर सकेंगे और निर्वासन का खतरा टल गया है. लेकिन सरकार की अपील के चलते यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.

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