कैंसर के आगे शरीर क्यों बेबस हो जाता है? रिसर्च में सामने आई असली वजह

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी शरीर में इतनी तेज़ी से कैसे फैल जाती है, यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों को परेशान करता रहा है. इसी रहस्य को समझने के लिए हाल ही में एक अहम अध्ययन किया गया, जिसमें कैंसर कोशिकाओं की एक हैरान करने वाली रणनीति सामने आई है. शोध में खुलासा हुआ है कि कैंसर कोशिकाएं न सिर्फ शरीर की रक्षा करने वाली इम्यून सेल्स से बच निकलती हैं, बल्कि उन्हें अपने ही पक्ष में मोड़कर बीमारी को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल भी करती हैं.

इम्यून सेल्स की ‘रीप्रोग्रामिंग’ का खेल

स्विट्जरलैंड की जिनेवा यूनिवर्सिटी और लुडविंग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अपनी खोज में पाया कि कैंसर कोशिकाएं इम्यून सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करती हैं. वे ‘न्यूट्रोफिल्स’ नामक खास इम्यून सेल्स की ‘रीप्रोग्रामिंग’ कर देती हैं. इसका अर्थ यह है कि जो इम्यून कोशिकाएं शरीर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होती हैं, कैंसर उन्हें इस तरह प्रभावित कर देता है कि वे ऐसे मॉलिक्यूल्स बनाने लगती हैं जो ट्यूमर की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं. इन मॉलिक्यूल्स की मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जाती है कि शरीर में कैंसर सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है.

स्वस्थ होने का नाटक और धोखा

अध्ययन में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. कैंसर कोशिकाएं इम्यून सेल्स को यह यकीन दिलाने में सफल हो जाती हैं कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. इसी भ्रम के कारण इम्यून सिस्टम उन्हें पहचान नहीं पाता और नष्ट करने में असफल रहता है. कई मामलों में कैंसर कोशिकाएं या तो प्रतिरक्षा कोशिकाओं से खुद को छिपा लेती हैं या उन्हें निष्क्रिय बना देती हैं. जब शरीर की सुरक्षा व्यवस्था ही उन्हें रोकने में नाकाम रहती है, तो कैंसर को बढ़ने और तेजी से फैलने का मौका मिल जाता है. इतना ही नहीं, कैंसर कोशिकाएं आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करती हैं, जिससे सूजन और ऐसे तत्व पैदा होते हैं जो बीमारी को और बढ़ावा देते हैं.

वैज्ञानिकों की राय

यह शोध ‘कैंसर सेल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है. जिनेवा यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी और इम्यूनोलॉजी विभाग के शोधकर्ता मिकेल पिटेट का कहना है कि ट्यूमर को बढ़ाने वाले तत्वों की पहचान करना एक कठिन काम है. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले ‘मैक्रोफेज’ (एक अन्य प्रकार की इम्यून सेल) में दो ऐसे जीन का पता लगाया था जो बीमारी बढ़ाते थे, लेकिन इस बार, नए अध्ययन में उन्होंने ‘न्यूट्रोफिल्स’ में हो रहे इस खतरनाक परिवर्तन को पकड़ा है.

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