युद्ध का एक नया मोर्चा खुला, इथोपिया और इरिट्रिया के बॉर्डर सैनिकों की लामबंदी तेज

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Ethiopia Eritrea Clash: दुनियाभर के कई देशों में छिड़े जंग के बीच एक और नया मोर्चा खुलने जा रहा है. दरअसल, अफ्रीकी देश इथोपिया ने इरिट्रिया से जंग के लिए इरिट्रिया सीमा पर सैनिकों की लामबंदी तेज कर दी है. इथोपिया का कहना है कि इरिट्रिया उसके यहां के बागियों को हथियार सप्लाई करता है, जिससे अस्थिरता का माहौल है. ऐसे में इरिट्रिया को सबक सिखाना जरूरी है.

बता दें कि इरिट्रिया इथोपिया का पड़ोसी मुल्क है. दरअसल, साल 1993 में इथोपिया से अलग होकर ही इरिट्रिया का गठन हुआ था. दोनों ही मुल्क ईसाई बहुल है, जहां मुसलमान अल्पसंख्यक हैं.

जंग लड़ने के मूड में इथोपिया

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इथोपिया की सेना तिग्ने विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पश्चिमी बॉर्डर पर एकजुट हो रही है. इस दौरान सेना की तैयारी युद्ध लड़ने की है, जिससे आने वाले वक्‍त में पूरे इलाके पर उसका कंट्रोल आसानी से हो जाए. इथोपिया की सेना तिग्ने विद्रोहियों से परेशान है. उनका कहना है कि इन विद्रोहियों को इरिट्रिया की सेना हथियार देती है, जिसके बूते ये इथोपिया में हिंसा करते हैं.

बार्डर पर दोनों पक्षों की ओर से की जा रही घेराबंदी

बता दें कि इथोपिया और इरिट्रिया के बीच जो मूवमेंट है, उससे पश्चिमी देशों के राजनयिक भी चिंतित हैं. एक पश्चिमी राजनयिक के मुताबिक, बार्डर पर दोनों ओर से घेराबंदी की जा रही है. इस दौरान एक तरफ इथोपिया की सेना है तो अभी दूसरी तरफ इरिट्रिया समर्थित तिग्ने की सेना. ऐसे में जंग कब छिड़ जाए कुछछ कहा नहीं जा सकता है.

दरअसल, साल 2020 से 2022 के बीच इथोपिया में इरिट्रियाई समर्थित तिग्ने सेना ने भारी कोहराम मचाया था. इसे उस वक्त इथोपिया का गृहयुद्ध करार दिया गया था, जिसमें करीब 6 लाख लोग मारे गए. इसके बाद दोनों के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया. इथोपिया में इसके बाद भी आंतरिक तौर पर संघर्ष जारी रहा. अब इथोपिया की सेना पूरी तरह से कार्रवाई की तैयारी में है.

दोनों में पहले भी हो चुका है जंग

1993 में इथोपिया से अलग होकर इरिट्रिया की स्थापना की गई. ऐसे में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच साल 1998 में युद्ध हुआ था, जो 2 वर्षो तक चला था. इस युद्ध में दोनों तरफ से करीब 1 लाख लोग मारे गए थे. इस जंग में इथोपिया को ज्यादा नुकसान हुआ था.

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