पुरूषों की तुलना में कम सोती है महिलाएं! जानिए क्‍या है ‘जेंडर स्‍लीप गैप’ की वजह

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Gender Sleep Gap: दुनियाभर में किए गए कई अध्ययनों से एक अहम और दिलचस्प तथ्य सामने आया है, जिससे जानने के बाद आप भी सोचने पर मजबूर हो सकते है. दरअसल, अध्‍ययन में पता चला है कि  महिलाओं और पुरुषों की नींद में स्पष्ट अंतर है, जिसे “जेंडर स्लीप गैप” कहा जा रहा है. यह सिर्फ नींद की मात्रा का फर्क नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और उससे जुड़े मानसिक प्रभावों का भी मामला है.

महिलाओं पर नींद का गहरा प्रभाव

बता दें कि 2017 के एक अध्ययन के अनुसार, 45 साल से कम उम्र की केवल 48 फीसदी माताएं ही रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद ले पाती हैं, जबकि बिना बच्चों वाली 62 फीसदी महिलाएं इतनी नींद लेती हैं. इससे यह साफ होता है कि मातृत्व महिलाओं की नींद पर गहरा असर डालता है.

इसी तरह 2025 में ‘स्लीप साइकल’ की एक वैश्विक रिपोर्ट में पाया गया कि 57 फीसदी महिलाएं औसतन सामान्य मूड के साथ जागती हैं, जो पुरुषों के मुकाबले करीब तीन अंक कम है. यह अंतर भले ही छोटा लगे, लेकिन यह लगातार नींद की कमी और खराब गुणवत्ता की ओर इशारा करता है.

बार बार टूटती है महिलाओं की नींद

महिलाओं की नींद अक्सर बार-बार टूटती है और उन्हें गहरी नींद कम मिलती है, जिससे शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता. इसके पीछे एक बड़ा कारण जीवन के अलग-अलग चरणों में होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं, जैसे मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज, जो नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं. इसके साथ ही सामाजिक कारण भी उतने ही अहम हैं. परिवार और बच्चों की देखभाल, घर और काम के बीच संतुलन, और लगातार रहने वाला मानसिक दबाव महिलाओं की नींद को और कमजोर कर देता है.

शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का दिमाग दिनभर अधिक मल्टीटास्किंग और भावनात्मक प्रोसेसिंग करता है, जिसके कारण उन्हें रिकवरी के लिए पुरुषों की तुलना में ज्यादा नींद की जरूरत होती है. लेकिन जब यह जरूरत पूरी नहीं होती, तो इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देता है.

बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की बुनियाद होती है नींद

लगातार नींद की कमी से महिलाओं में थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव, हार्मोनल असंतुलन और दिल तथा मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में “जेंडर स्लीप गैप” को समझना और इसे कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, क्योंकि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद है.

इसे भी पढें:-Redmi का 100-इंच स्क्रीन वाला नया Smart TV लॉन्च, 4K डिस्प्ले और 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ बड़ा धमाका

 

Latest News

Chaitra Navratri 6th Day: नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित, जानें पूजा विधि व मंत्र

Chaitra Navratri 6th Day: नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति की छठवें स्‍परूप मां कात्‍यायनी की पूजा की जाती है....

More Articles Like This