युद्धविराम के बावजूद ईरान का अटैक जारी, कुवैत पर ड्रोन हमला, सऊदी अरब के अहम तेल पाइपलाइन को भी नुकसान

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US Israel Iran War LIVE Updates: ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने दो हफ्ते के युद्धविराम के बावजूद गुरुवार को कुवैत पर ड्रोन हमले किए. इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित वार्ता से पहले युद्धविराम पर दबाव बढ़ा दिया है. कुवैत के विदेश मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के जरिए जारी बयान में कहा कि गुरुवार रात ड्रोन हमलों में कुवैत की कुछ महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया गया.

देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान

उधर, सऊदी अरब ने कहा कि हाल ही में हुए हमलों में उसकी एक अहम तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है. सऊदी प्रेस एजेंसी ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि हालिया हमले में देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है. यह पाइपलाइन तेल को लाल सागर तक पहुंचाती है और होरमुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करती है, जिस पर ईरान का नियंत्रण माना जाता है.

युद्धविराम स्वीकार करना कमजोरी नहीं

इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि युद्धविराम स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि ईरान की जीत को मजबूत करने का तरीका है. हालांकि युद्धविराम के बाद बड़े हमले फिलहाल थमते दिख रहे हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक हैं और किसी भी समय तनाव फिर बढ़ सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्धविराम की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए.

लेबनान के साथ सीधे वार्ता की अनुमति

उन्होंने कहा कि ईरान Strait of Hormuz से तेल के आवागमन को सही तरीके से नहीं होने दे रहा है, जो समझौते का उल्लंघन है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधे वार्ता की अनुमति दे दी है. इस वार्ता का उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच संबंध स्थापित करना है.

इजरायल और लेबनान के बीच कोई युद्धविराम नहीं

हालांकि, नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल और लेबनान के बीच कोई युद्धविराम नहीं है. उत्तरी इजरायल की सुरक्षा बहाल होने तक हिजबुल्लाह पर हमले जारी रहेंगे. इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत अगले सप्ताह वाशिंगटन में शुरू हो सकती है. लेकिन दशकों से चले आ रहे संघर्ष, हिजबुल्लाह की मौजूदगी और सीमा विवाद के चलते समझौता करना आसान नहीं होगा.

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