ईरान के समर्थन में कूदे हूती विद्रोहियों के पास मिसाइल से ड्रोन तक का खेप, किसी देश की सेना जैसी ताकत!

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US-Iran War: अमेरिका चल रही जंग के बीच ईरान के समर्थन में उतरे हूती ग्रुप के पास किसी देश की सेना जैसी ताकत है. उनके पास मिसाइल से लेकर ड्रोन और बोट तक मौजूद है. हूती विद्रोही दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन गैर-राज्य सैन्य ताकत में से एक के रूप में उभरे हैं. रेड सी यानी लाल सागर में जहाजरानी को धमकाने के लिए वे एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बिजनेस को लेकर गंभीर चिंताएं

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच सऊदी तेल टैंकरों पर उनके हालिया हमलों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से होने वाले बिजनेस को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं. पूर्वोत्तर अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच फैला लाल सागर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. हर साल हजारों कॉमर्शियल जहाज कच्चे तेल, एलएनजी और उपभोक्ता सामान लेकर बाब अल-मंदेब से गुजरते हुए स्वेज नहर की ओर जाते हैं.

एक बड़े हिस्से को कंट्रोल

बाब अल-मंदेब एक सकरा सा मार्ग है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है. हूती इस रूट के पास यमन के पश्चिमी तट के एक बड़े हिस्से को कंट्रोल करते हैं. इस हफ्ते की शुरुआत में हूती समूह ने सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी. उनके मुताबिक उनकी सेना ने 22 जुलाई को एन्सेलिया और लैला नामक 2 सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. सऊदी अरब ने स्वीकार किया कि एन्सेलिया पर हमला हुआ था, जिससे उसके धनुषाकार हिस्से के पास आग लग गई.

हूती पहला नॉन स्टेट सशस्त्र संगठन

हालांकि लैला पर हमले की पुष्टि नहीं हुई है. ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं. मिलिट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूती संघर्ष के दौरान एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करने वाला हूती पहला नॉन स्टेट सशस्त्र संगठन बन गया है. आसिफ की रेंज लगभग 450 से 500 किलोमीटर है. तंकिल मारक क्षमता भी लगभग 500 किलोमीटर है. फलेक की अनुमानित रेंज लगभग 140 किलोमीटर है.

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