Washington: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के बीच ईरान ने पूरे अमेरिका को झटका दिया है. अमेरिकी अधिकारियों ने कई राज्यों में गैस स्टेशनों के फ्यूल स्टोरेज टैंकों की निगरानी करने वाले सिस्टम में सेंधमारी का शक जताया है. इसके पीछे ईरानी हैकर्स का हाथ बताया है. हैकर्स ने ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम का फायदा उठाया. उन्हें निशाना बनाया गया है, जिनके पासवर्ड से सुरक्षित नहीं थे.
टैंकों के ईंधन के साथ कोई बदलाव नहीं
अमेरिकी अधिकारियों को शक है कि ईरान के हैकर्स ने कई राज्यों में गैस स्टेशनों के ऑटोमैटिक टैंक ATG में सेंध लगाई है. हैकर्स ने उन सिस्टम का फायदा उठाया जो ऑनलाइन थीं और पासवर्ड से सुरक्षित नहीं थे. उन्होंने टैंकों के ईंधन के साथ कोई बदलाव नहीं किया है. केवल डिस्प्ले रीडिंग के साथ छेड़छाड़ की. हालांकि इससे फ्यूल को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
गैस रिसाव का पता चलने से रोक
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एटीजी तक पहुंच होने से हैकर्स गैस रिसाव का पता चलने से रोक सकते हैं. सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है. फोरेंसिक सबूतों की कमी के कारण इसके जिम्मेदार तत्वों का निश्चित पता लगाना मुश्किल हो रहा है. यदि इस हैकिंग में ईरान का हाथ साबित होता है तो यह मौजूदा अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी बुनियादी ढांचे को डराने का नया मामला होगा.
बढ़ी हुई गैस की कीमतों पर जनता का ध्यान
यह मामला ट्रंप प्रशासन को भी चिंता में डालने वाला है. यह युद्ध के कारण बढ़ी हुई गैस की कीमतों पर जनता का ध्यान खींचेगा. पहले से ही अमेरिकी नागरिकों के बजट को प्रभावित कर रही है. यह हमला उन बुनियादी ढांचा ऑपरेटरों के लिए भी चेतावनी है जो सिस्टम को सुरक्षित नहीं कर पाए हैं. ईरानी हैकिंग समूह अक्सर ऑनलाइन मौजूद कमजोर और असुरक्षित सिस्टम को अपना निशाना बनाते हैं.
तेल, गैस और वॉटर साइटों में बाधाएं
युद्ध की शुरुआत के बाद से तेहरान से जुड़े हैकर्स ने अमेरिकी तेल, गैस और वॉटर साइटों में बाधाएं डाली हैं. इससे मेडिकल टूल बनाने वाली कंपनी ‘स्ट्राइकर’ की शिपिंग में देरी की है. एफबीआई निदेशक काश पटेल के पुराने निजी ईमेल लीक किए हैं. इसके साथ ही उन्होंने इजरायली संगठनों और नागरिकों को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया है.
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