AI Jobs in India: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव अब केवल तकनीक और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार, कॉर्पोरेट वर्क कल्चर और ऑफिस स्पेस की दुनिया में भी बड़ा बदलाव ला रहा है. पिछले कुछ वर्षों में एआई तकनीक ने जिस गति से विकास किया है, उसने कंपनियों के काम करने के तरीके से लेकर भर्ती प्रक्रिया तक को बदलना शुरू कर दिया है.
अब कंपनियां पारंपरिक कौशल से आगे बढ़कर AI, मशीन लर्निंग और जेनरेटिव AI जैसी तकनीकों में विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं. इसी बीच स्ट्रैटेजी कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की नई रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं. रिपोर्ट के अनुसार भारत में AI से जुड़ी नौकरी की पोस्टिंग वर्ष 2019 के मुकाबले लगभग छह गुना बढ़ गई है. तेजी से बढ़ती यह मांग इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक AI टैलेंट और AI कार्यान्वयन केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है.
AI जॉब्स में तेजी से बढ़ रही मांग
रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2025 तक AI से जुड़ी जॉब पोस्टिंग की संख्या 2.9 लाख से अधिक पहुंच गई है. इसके पीछे मशीन लर्निंग, जेनरेटिव AI और एमएल ऑप्स (MLOps) जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ प्रतिभाओं की बढ़ती जरूरत को मुख्य वजह माना गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI आधारित तकनीकों का उपयोग और अधिक बढ़ेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा होंगे.
ऑफिस बाजार में भी होगा बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI आधारित भर्ती में तेजी का असर भारत के ऑफिस बाजार पर भी दिखाई देगा. इससे आने वाले वर्षों में ऑफिस स्पेस की मांग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. ‘AI and the Future of Flexible Workspaces’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक 2025 से 2030 के बीच भारत के नॉलेज-इकोनॉमी ऑफिस स्पेस में लगभग 7.9 करोड़ वर्ग फुट अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है. यह अनुमान AI के प्रभाव से पहले लगाए गए अनुमानों से भी अधिक है.
फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग में होगा उछाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि AI आधारित टीमें पहले की तुलना में अधिक विशेषज्ञता आधारित, सहयोगी और तेजी से बदलने वाली हो गई हैं. ऐसे में कंपनियां अब पारंपरिक ऑफिस मॉडल से हटकर अधिक लचीले कार्यस्थलों की ओर बढ़ रही हैं. रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एसोसिएट पार्टनर छवि सिंह ने कहा, “अब तक एआई को लेकर चर्चा मुख्य रूप से रोजगार पर पड़ने वाले असर तक सीमित थी, लेकिन जमीन पर हम ऑफिस स्पेस के उपयोग के तरीके में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं.” उन्होंने कहा, “एआई-आधारित टीमें अब ज्यादा विशेषज्ञता वाली, सहयोग आधारित और तेजी से बदलने वाली हो गई हैं. इससे कोर प्लस फ्लेक्स वर्कप्लेस मॉडल की मांग बढ़ रही है, जहां कंपनियां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों के अनुभव से समझौता किए बिना लचीलापन चाहती हैं.”
भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट हब
रिपोर्ट के मुताबिक AI टैलेंट कंसंट्रेशन ग्रोथ के मामले में भारत अब दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. इसके पीछे वैश्विक स्तर पर AI में तेजी से बढ़ता निवेश एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में AI सेक्टर में निवेश बढ़कर लगभग 582 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.
भारत का ऑफिस सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा
रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऑफिस स्पेस वर्ष 2025 तक बढ़कर करीब 91.5 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गया है, जबकि देश में कुल रोजगार संख्या लगभग 33 करोड़ कामगारों तक पहुंच चुकी है. इसके साथ ही भारत के फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर में भी तेजी से विस्तार देखा गया है. वर्ष 2020 में जहां इसका आकार लगभग 3.3 करोड़ वर्ग फुट था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 10.3 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो गया है.
कंपनियां बढ़ा सकती हैं फ्लेक्स वर्कस्पेस का इस्तेमाल
अध्ययन में शामिल लगभग 82 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि वे अगले दो वर्षों में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस के इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना बना रही हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अकेले AI आधारित भर्ती से वर्ष 2030 तक फ्लेक्स सीट लीजिंग की कुल मांग में लगभग 31 प्रतिशत योगदान मिलने की संभावना है.
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