‘Melody’ ने शेयर बाजार में कराया खेल! निवेशकों ने गलत कंपनी पर लगा दिया पैसा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Parle Melody Share Confusion: शेयर बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी की पूरी जानकारी और रिसर्च करना कितना जरूरी होता है, इसका एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला मामला सामने आया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा और वहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हुई मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी’ नाम अचानक तेजी से ट्रेंड करने लगा. इंटरनेट पर ‘मेलोडी’ को लेकर मीम्स, पोस्ट और चर्चाओं की बाढ़ आ गई. इस पूरे माहौल को देखकर कुछ भारतीय रीटेल निवेशकों ने भी मौके को निवेश का अवसर समझ लिया, लेकिन जल्दबाजी में उनसे एक ऐसी गलती हो गई जिसने सभी को हैरान कर दिया.

दरअसल निवेशकों ने बिना पूरी जानकारी लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड ‘पार्ले इंडस्ट्रीज’ के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. अचानक आई भारी खरीदारी की वजह से कंपनी का शेयर करीब 5 फीसदी चढ़कर अपर सर्किट पर पहुंच गया. लेकिन यहां सबसे बड़ा ट्विस्ट यह था कि जिस ‘मेलोडी’ टॉफी के नाम पर लोग निवेश कर रहे थे, उसका इस कंपनी से कोई संबंध ही नहीं था.

बिना कंपनी समझे निवेशकों ने शुरू कर दी खरीदारी

बताया जा रहा है कि कई निवेशकों को लगा कि ‘मेलोडी’ टॉफी और ‘पार्ले-जी’ जैसे मशहूर उत्पाद बनाने वाली कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड है. ऐसे में लोगों ने बीएसई पर ‘पार्ले’ नाम सर्च किया और सामने आए ‘पार्ले इंडस्ट्रीज’ के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. हैरानी की बात यह रही कि कई लोगों ने कंपनी का बिजनेस मॉडल, फंडामेंटल या प्रोफाइल तक चेक नहीं किया. उन्होंने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि कंपनी वास्तव में किस क्षेत्र में काम करती है.

नतीजा यह हुआ कि इटली में हुई एक राजनीतिक मुलाकात, सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड और जल्दबाजी में लिए गए फैसले ने एक ऐसी कंपनी के शेयर को उछाल दिया जिसका टॉफी या बिस्कुट कारोबार से कोई लेना-देना नहीं था.

मेलोडी और पार्ले-जी बनाने वाली कंपनी बाजार में लिस्टेड ही नहीं है

जिस कंपनी को लेकर निवेशकों के बीच भ्रम पैदा हुआ, उसका वास्तविक नाम पार्ले प्रोडक्ट्स (Parle Products) है. यही कंपनी देशभर में मशहूर पार्ले-जी, मेलोडी, हाइड एंड सीक, क्रैकजैक, मोनाको और किस्मी जैसे कई लोकप्रिय उत्पाद बनाती है. यह कंपनी करीब 97 साल पुरानी देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1929 में मोहनलाल दयाल ने की थी. हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्ले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी नहीं है. यह पूरी तरह से एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है. यानी इसके शेयर आम निवेशकों के लिए स्टॉक मार्केट में उपलब्ध ही नहीं हैं.

जिस कंपनी के शेयर खरीद लिए, उसका कारोबार कुछ और ही निकला

जिस ‘पार्ले इंडस्ट्रीज’ के शेयर निवेशकों ने खरीद लिए, उसका कारोबार खाद्य उत्पादों से बिल्कुल अलग है. कंपनी मुख्य रूप से रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और वेस्ट रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती है. यानी जिन लोगों को लगा कि वे मशहूर टॉफी और बिस्कुट ब्रांड के भविष्य में निवेश कर रहे हैं, वे वास्तव में किसी दूसरे सेक्टर की कंपनी में निवेश कर बैठे.

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब निवेशकों ने नाम के भ्रम में गलत कंपनी के शेयर खरीद लिए हों. इससे पहले भी ऐसा मामला सामने आ चुका है जब एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर ‘Signal’ ऐप इस्तेमाल करने की सलाह दी थी. उस समय कई निवेशकों ने भ्रम में ‘Signal Advance’ नाम की एक अलग कंपनी के शेयर खरीद लिए थे, जिससे उसके शेयर में अचानक उछाल आ गया था.

निवेश से पहले रिसर्च बेहद जरूरी

यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि शेयर बाजार में सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड, नाम या अफवाहों के आधार पर निवेश करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके बिजनेस मॉडल, फंडामेंटल और वास्तविक गतिविधियों को समझना बेहद जरूरी होता है.

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