706 व्हेल और डॉल्फिन का एक साथ कत्ल! हजार साल पुरानी परंपरा ने लाल किया समंदर

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Denmark: डेनमार्क के हिस्से फरोए द्वीप से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां परंपरा के नाम पर 700 से ज्यादा व्हेल और डॉल्फिन को एक साथ दर्दनाक मौत दी गई. हर साल होने वाली इस परंपरा को “ग्रिंडाद्राप” या “ग्राइंड” कहा जाता है.

इस परंपरा को मानते हुए स्थानीय लोग हुक और चाकू का इस्तेमाल करके अटलांटिक व्हाइट-साइडेड डॉल्फिन और लॉन्ग-फिन्ड पायलट व्हेल को पकड़कर कम गहरे वाले समुद्री खाड़ियों में ले जाते हैं. फिर उन्हें बेरहमी से मार दिया जाता है. जब यह सब हो रहा था तब किनारे पर खड़े लोग, यहां तक कि बच्चे भी, यह सब देखते रहे. इन जलीय जानवरों के शरीर काट दिए गए और बाद में उन्हें खाने के लिए बांट दिया गया.

क्या है पूरा मामला

पर्यावरण संगठन सी शेफर्ड के मुताबिक, यह समूह में व्हेल और डॉल्फिन मारने की यह घटनाएं 27 मई को तीन अलग-अलग जगह हुईं. यह जगह स्कॉटलैंड से लगभग 200 मील उत्तर में है.

पहला तोर्शावन में 402 पायलट व्हेल और 4 बॉटलनोज़ डॉल्फिन मारी गईं.

दूसरा स्कालाबोटनुर में 168 व्हाइट-साइडेड डॉल्फिन मारी गईं.

तीसरा ह्वालविक में 132 व्हाइट-साइडेड डॉल्फिन मारी गईं

ऐसे में कुल मिलाकर 706 जानवरों की मौत हुई. रिपोर्टों के अनुसार, इन जानवरों को मारने में शिकारियों को काफी समय लगा. इस वजह से यह जलीय जानवर जानवर लंबे समय तक दर्द और तड़प में रहे.

क्या है यह वाइकिंग युग की परंपरा?

इसे मानने वालों का कहना है कि यह एक हजार साल पुरानी वाइकिंग काल की परंपरा है, जबकि जानवरों के अधिकारों की वकालत करने वाले एक्टिविस्ट इसे बहुत क्रूर और पुरानी प्रथा मानते हैं, जो आज के समय में जरूरी नहीं है.

बता दें कि फरोए द्वीप डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है, जो इस परंपरा का बचाव करता है. उनका कहना है कि यह उनकी संस्कृति का जरूरी हिस्सा है और इससे समुदाय को भोजन मिलता है. खास बात थी कि इन बड़े शिकारों से एक दिन पहले यानी 26 मई को ही फरोए द्वीप की संसद ने अपने पशु कल्याण कानून को बदल दिया. उन्होंने डॉल्फ़िन को सुरक्षा देने वाला हिस्सा कानून से हटा दिया.

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