क्या है वन चाइना पॉलिसी, आखिर क्यों चीन ने 10 लाख बच्चों को किया परिवारों से दूर?

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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China: चीन दशकों से तिब्बत पर अवैध कब्जा जमाए बैठा है और अब वहां के लोगों को घुलने-मिलने पर मजबूर कर रहा है. यहां तक कि तिब्बती परिवारों से वह बच्चों को उठा रहा है और उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में रहने पर मजबूर कर रहा है. बताया जा रहा है कि इन बच्चों को साल भर में एक बार ही घर जाने दिया जाता है ताकि तिब्बती मूल के लोगों के बीच उनकी संस्कृति का प्रभाव खत्म कर दिया जाए.

इसी बीच भू-राजनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने चीन की इस नीति पर सवाल उठाए हैं. उन्होने एक लेख में लिखा कि करीब एक मिलियन तिब्बती बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें जबरन मंदारिन भाषा के बोर्डिंग स्कूलों में रखा जा रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि इन बच्चों को उनकी मूल तिब्बती भाषा और कल्चर से दूर किया जाए.

बच्चों को मूल कल्चर से किया जा रहा दूर

उन्होंने कहा कि ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें 4 या 5 साल की उम्र में ही परिवारों से दूर कर दिया जाता है और उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में रखा जाता है. इन संस्थानों को चीन विकास के नाम पर तेजी से स्थापित कर रहा है, लेकिन इनमें बच्चों को पढ़ाने का असली मकसद यही है कि उन्हें उनके मूल कल्चर से दूर कर दिया जाए.

सुत्रो के मुताबिक, करीब एक लाख तिब्बती धर्मशाला, दिल्ली समेत भारत के अलग-अलग हिस्सों में निर्वासित जीवन जी रहे हैं. चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर कब्जा जमा लिया था, तभी से ये लोग निर्वासित जीवन जी रहे हैं, वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी है, जो तिब्बत में तो हैं, लेकिन अपनी मूल संस्कृति, धर्म और भाषा से दूर रहने को मजबूर हैं. चीन उन पर मंदारिन भाषा थोपने की कोशिश में रहा है, जो सिर्फ मानवाधिकार का हनन ही नहीं है बल्कि भू-राजनीतिक प्रोजेक्ट भी है.

कैसे शिक्षा व्यवस्था के जरिए चीन जमा रहा कब्जा

बता दें कि चीन की नीति यह है कि यदि बच्चों के मन को कंट्रोल कर लिया तो आप फ्यूचर को कंट्रोल कर सकते हैं. दरअसल, तिब्बती संस्कृति में प्राचीन दौर से ही मठ आदि शिक्षण का माध्यम रहे हैं. अब इनसे तिब्बती बच्चों को दूर किया जा रहा है. यहां चीनी शिक्षा व्यवस्था के तहत चलने वाले मंदारिन भाषी स्कूलों को थोपा जा रहा है. ऐसा इसलिए ताकि तिब्बती मूल के बच्चे अपने कल्चर से दूर हट सकें. इस तरह चीन ने अपनी वन चाइना पॉलिसी के तहत तिब्बत को पूरी तरह से हथियाने के लिए शिक्षा को भी एक सॉफ्ट पावर के रूप में चुना है.

 

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