बांग्लादेश: शेख हसीना के कार्यकाल का परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट बनकर तैयार, अब पूरा श्रेय लेने में जुटी रहमान सरकार

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Dhaka: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में शुरू हुआ रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र अब बनकर तैयार हो गया है. लेकिन, इसके पूरे होने पर इसका सीधा लाभ मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार को मिलने जा रहा है. देश की बिजली सप्लाई की तस्वीर अगले दो साल में पूरी तरह बदल सकती है. पद्मा नदी के किनारे बन रहा रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ऐसा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो देश के लिए किसी अलादीन के चिराग से कम नहीं होगा.

बिजली जरूरत का 15 फीसदी पूरा करेगा

करीब 12.65 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) की लागत से तैयार हो रहे इस प्लांट के पूरी तरह चालू होने के बाद अकेले यह बांग्लादेश की कुल बिजली जरूरत का लगभग 15 फीसदी पूरा करेगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूपपुर परमाणु परियोजना में रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम के सहयोग से दो आधुनिक परमाणु रिएक्टर लगाए जा रहे हैं. पहला रिएक्टर 2027 की शुरुआत में और दूसरा 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दोनों यूनिट मिलकर 2.4 गीगावॉट बिजली उत्पादन करेंगी.

बिजली संयंत्र लगाने की जरूरत नहीं

इसके बाद बांग्लादेश को अगले पांच से सात वर्षों तक बड़े बेसलोड बिजली संयंत्र लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे सरकार सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय परियोजनाओं पर ज्यादा निवेश कर सकेगी. यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट के दौरान दुनिया ने देखा कि तेल और गैस की सप्लाई अटकने से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. बांग्लादेश भी इससे अछूता नहीं रहा. पेट्रोल-डीजल की किल्लत की वजह से यहां कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती हुई. इसका सीधा असर उद्योग धंधों पर भी पड़ा.

उस रणनीति को मजबूत किया

ऐसे हालात ने सरकार की उस रणनीति को मजबूत किया है, जिसके तहत आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है. बांग्लादेश की यह महत्वकांक्षी परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी. पहले कोविड-19 महामारी, फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और इसके बाद ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग के कारण इसमें देरी पर देरी होती रही. इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले बांग्लादेशी टका कमजोर होने से प्रोजेक्ट की लागत करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ गई.

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