Hariyali Teej 2026:14 या 15 अगस्त.. किस दिन रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत? जानिए सही तारीख और पूजा विधि

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Hariyali Teej 2026: हर साल श्रावण माह के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है. यह त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पति की आयु लंबी होती हैं. कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती मिले थे. शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती सैकड़ों वर्षों की तपस्या के बाद भगवान शिव से मिली थीं. इसी वजह से देवी पार्वती को ‘तीज माता’ के रूप में भी जाना जाता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल हरियाली तीज कब मनाई जाएगी और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा…

कब है हरियाली तीज?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा.

हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 से 05:35 तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 01:08 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 से 03:42 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 से 07:29 तक
  • अमृत काल: रात 08:18 से 09:53 तक

हरियाली तीज की पूजा विधि

  • इस दिन व्रत को करने के लिए महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें.
  • एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें.
  • फिर शुद्ध मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं.
  • यदि मिट्टी की प्रतिमा बनाना संभव न हो, तो उनकी तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर सकते हैं.
  • माता को सोलह श्रृंगार का सामान (साड़ी, चुनरी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, महावर, काजल, आदि), फल, फूल, मिठाई (विशेषकर घेवर और फीणी) चढ़ाएं.
  • भोलेनाथ के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, फल, जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी (पंचामृत), चंदन, अक्षत चढ़ाएं.
  • फिर हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें.
  • अंत में भगवान शिव और देवी पार्वती की आरती करें और हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.
  • अगले दिन (या जब व्रत खोलें), मिट्टी की प्रतिमाओं और पूजा सामग्री को किसी नदी या पवित्र जल में विसर्जित कर दें.
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