US Iran War: अब असैन्य ठिकानों को निशाना बनाया अमेरिका-ईरान ने, ट्रंप ने दी चेतावनी

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष  की आग शांत होने की बजाय और भड़कती जा रही है. लगातार बुधवार की 12वीं रात अमेरिकी सेना ने ईरान पर हवाई हमले किए. इस बीच दोनों देशों के बीच टकराव अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर असैन्य बुनियादी ढांचे तक पहुंच गया है.

अमेरिका और ईरान पर नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों को खतरा पहुंचा सके. अमेरिका का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सामान्य करने और जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान चला रहा है.

सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा तो अमेरिका जवाब में ईरान के एक पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा.

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान “जैसे को तैसा” की नीति पर चलेगा. उन्होंने कहा कि ईरान या उसके बुनियादी ढांचे पर किसी भी आक्रामक कार्रवाई का शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान के अहवाज, रमशीर और अंदीमेश्क के आसपास कई ठिकानों को निशाना बनाया. वहीं, इराक सीमा के निकट शलमचेह कस्बे में हुए एक हमले में दो लोगों की मौत होने की भी खबर है.

कुवैत के सैन्य अधिकारियों ने कहा कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से किए गए ड्रोन हमलों का मुकाबला किया. इससे पहले भी ईरान पर कुवैत के बिजली संयंत्रों और जल विलवणीकरण संयंत्रों को निशाना बनाने के आरोप लग चुके हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है. समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. विश्लेषकों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो, वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, कई देशों की ओर से मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल किसी बड़े कूटनीतिक समाधान के संकेत नहीं मिले हैं.

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