स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम से 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को मिला सहारा: सरकार

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. सरकार के अनुसार, स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के तहत जून 2026 के अंत तक देशभर में 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की जा चुकी है. इस योजना के जरिए ग्रामीण उद्यमियों की आय और मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ-साथ समाज के वंचित वर्गों को उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है.

86 फीसदी लाभार्थी SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों से

सरकार के मुताबिक, SVEP से लाभान्वित होने वाले करीब 86 प्रतिशत उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं. इससे पता चलता है कि योजना का लाभ समाज के उन वर्गों तक भी पहुंच रहा है, जिनके लिए आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना कारोबार शुरू करना मुश्किल रहा है. असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे प्रमुख राज्य हैं, जहां SVEP के तहत सबसे ज्यादा ग्रामीण उद्यमों को सहायता दी गई है.

प्रशिक्षण से वित्तीय सहायता तक मिल रही मदद

स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम को स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से लागू किया जाता है. इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यम शुरू करने वाले लोगों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मेंटरिंग और समुदाय आधारित संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है. योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और टिकाऊ व्यवसायों को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकें.

SHG और मुद्रा योजना के साथ समन्वय

सरकार ने बताया कि SVEP को स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलों के साथ जोड़ा गया है. इन योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल से ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है. सरकार के अनुसार, SVEP अब सिर्फ व्यवसाय शुरू कराने की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह गरीबी उन्मूलन, स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है.

SVEP के लिए 942.09 करोड़ रुपये जारी

योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक 942.09 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है. सरकार के मुताबिक, यह राशि योजना की शुरुआत के शुरुआती दौर में जारी किए गए 112.39 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 738 प्रतिशत अधिक है. SVEP की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी. योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश करीब 27,083 रुपये बताया गया है.

महिलाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों पर खास फोकस

सरकार का कहना है कि SVEP ने यह साबित किया है कि मजबूत सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता समावेशी आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकती है. योजना के तहत विशेष रूप से महिलाओं, SC-ST समुदायों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी सहायता दी जा रही है. सरकार के अनुसार, इससे परिवारों की आय, बचत और जीवन स्तर में सुधार हुआ है.

CRP-EP की क्या है भूमिका?

SVEP के तहत कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) ग्रामीण उद्यमियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. CRP-EP का चयन स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों की ओर से परीक्षण, प्रशिक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद संयुक्त रूप से किया जाता है. इस प्रक्रिया में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाती है. उम्मीदवारों के पास व्यवसाय और गणित का बुनियादी ज्ञान होना जरूरी है.

सरकार के अनुसार, कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP ऐसे परिवारों से चुने जाते हैं, जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं. वहीं, इस कैडर में महिलाओं की हिस्सेदारी कम से कम 60 प्रतिशत रखने का प्रावधान है. एक CRP-EP औसतन 50 ग्रामीण उद्यमों को मेंटरिंग, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा हासिल करने में मदद करता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम

SVEP के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि सामुदायिक संस्थाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता को एक साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ उद्यम खड़े किए जा सकते हैं. 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहायता और वंचित वर्गों की बड़ी भागीदारी SVEP के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है. सरकार के मुताबिक, आने वाले समय में योजना का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

यह भी पढ़े: Auto Sales July 2026: जुलाई में ऑटो बिक्री 28.6% बढ़ी, दोपहिया, SUV और ट्रैक्टर की बिक्री में जोरदार उछाल

Latest News

राष्ट्रपति ने मंजूर किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

Dharmendra Pradhan Resignation: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. राष्ट्रपति...

More Articles Like This