नेपाल में भूकंप के बाद आया विनाशकारी बाढ़: घर, गाड़ियों और पुल-पावर प्रोजेक्ट सब तबाह, चीन बॉर्डर पर अभी भी वाटर ब्लॉकेज

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Nepal Flash Floods: नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ में लगभग 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिसमें में 133 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं. भोटे कोशी नदी में आए तेज सैलाब ने लोगों, घरों, गाड़ियों और पुल-पावर प्रोजेक्ट जैसे जरूरी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया. नेपाल सेना ने बताया कि बचाव और राहत कार्यों के लिए 14 हेलीकॉप्टर और आपदा राहत टीमें तैनात की गई हैं.

बता दें कि तिब्बत की ओर से आती हुई बाढ़ की लहरें बुधवार सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोटे कोशी नदी में तेजी से बढ़ीं. लोगों को मौका तक नहीं मिला. इसरो और US जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर के ढहने से भूकंप जैसी हलचल हुई और निचले इलाकों में तबाही सैलाब के रूप में पहुंची. 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे नेपाल और चीन की सीमा के पास 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था और फिर तबाही का चेन रिएक्शन शुरू हुआ.

आपदा की चेतावनी जारी

इस भयावह तबाही के बाद वैज्ञानिकों ने एक और संभावित आपदा की चेतावनी जारी की है. काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) का कहना है कि नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में अब भी एक पानी का अवरोध (वाटर ब्लॉकेज) मौजूद है, जो टूटने पर एक नया जलसैलाब पैदा कर सकता है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब हालिया बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है और कई बस्तियों, सड़कों तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है. वैज्ञानिक अब इस आपदा के कारणों की जांच कर रहे हैं और साथ ही यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि क्या आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है.

हिमालयी क्षेत्र की प्रमुख संस्था ने जारी की चेतावनी

यह चेतावनी हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण, ग्लेशियर, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं पर शोध करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने जारी की है. काठमांडू स्थित यह संस्था 1983 से हिंदूकुश-हिमालयी क्षेत्र के आठ देशों भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान के साथ काम करती है.

दूसरी बाढ़ की आशंका सबसे बड़ी चिंता

ICIMOD में जलवायु और पर्यावरणीय जोखिम विभाग के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने कहा, ‘पिछले वर्ष रसुवा बाढ़ से प्रभावित हुआ यही इलाका फिर खतरे में है. लेंधे खोला क्षेत्र में बर्फ के बड़े हिस्से के टूटकर गिरने (आइस एवलांच) को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है. नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में अब भी एक अवरोध मौजूद है और दूसरी बाढ़ की आशंका बनी हुई है.’

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