दुनिया के सबसे खूनी चैप्टर का अंत, बड़े पैमाने पर नरसंहार को अंजाम देने वाले ‘बोस्निया के कसाई’ की जेल में मौत

Must Read

New Delhi: नीदरलैंड की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे रात्को म्लादिच की मौत हो गई. जिसकी पहचान इतिहास के पन्नों में ‘बोस्निया का कसाई’ के तौर पर दर्ज की गई है. 1990 के दशक में युगोस्लाविया के युद्ध और इसके टूटकर अलग-अलग देश बनने के उस दौर में रात्को ने बड़े पैमाने पर नरसंहार को अंजाम दिया. 27 अगस्त को दुनिया के सबसे खूनी चैप्टर में से एक का अंत तब हो गया जब यह खबर सामने आई कि 84 साल इस युद्ध कमांडर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है.

स्रेब्रेनिका नरसंहार की भी जिम्मेदारी

बुराई की मूरत कहे जाने वाले इस बोस्नियाई-सर्ब जनरल पर 1992 में शुरू हुए साराजेवो के 1425 दिनों के खौफनाक घेराव के साथ-साथ स्रेब्रेनिका नरसंहार की भी जिम्मेदारी थी, जिसमें 8000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी. इसमें अधिकांश मुसलमान थे. नीली आंखों और मजबूत कद-काठी वाले रात्को म्लादिच के हाथ बेरहमी से कत्लेआम से रंगे हुए हैं. नरसंहार और युद्ध अपराधों के मामलों में संयुक्त राष्ट्र (UN) की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे रात्को म्लादिच का निधन हो गया.

भयानक विभीषिका का प्रतीक

रात्को म्लादिच सिर्फ एक बोस्नियाई-सर्ब जनरल का नहीं है, बल्कि 1990 के दशक के यूगोस्लाव युद्धों की उस भयानक विभीषिका का एक प्रतीक है, जिसे आज भी सिहरन पैदा कर देती है. 27 अगस्त को दुनिया के सबसे खूनी चैप्टर में से एक का अंत तब हो गया जब यह खबर सामने आई कि 84 साल इस युद्ध कमांडर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. म्लादिच को ‘बोस्निया के कसाई’ के रूप में भी जाना जाता था, नीदरलैंड्स के हेग स्थित यूएन जेल अस्पताल में नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहा था.

वर्ल्ड वार के दौरान हुआ था जन्म 

उसका जन्म पूर्वी बोस्निया के कालिनोविक में दूसरे वर्ल्ड वार के दौरान हुआ था. अधिकतर दस्तावेजों के मुताबिक 1942 में हालांकि म्लादिच का कहना था कि उसका जन्म असल में 1943 में हुआ था. युद्ध के अंतिम दौर में उसके पिता मार्शल टीटो की सेना के लिए लड़ते हुए मारे गए थे. टीटो वही नेता थे, जिन्होंने बहु-नस्लीय देश यूगोस्लाविया को एकजुट रखा था और अंदर सुलग रही दुश्मनी को दबाकर रखा था. वह कम्युनिस्ट परिवार से ताल्लुक रखने वाला शख्स था, जिसकी युवावस्था तक इसी विचारधारा के तौर पर परवरिश रही. ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि म्लादिच हमेशा से एक सैनिक बनना चाहता था.

इसे भी पढ़ें. नशा व्यक्ति ही नहीं, परिवार और राष्ट्र की प्रगति पर भी प्रतिकूल असर डालता हैः ब्रजेश पाठक

Latest News

27 October 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Panchang 27 October 2026: 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है. इस दिन अशून्य...

More Articles Like This